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AIS में दिख रहा अलग आंकड़ा; ऐसे करें ITR में सुधार
By EditorialPublished on
कई करदाताओं ने इस बार एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में गड़बड़ियां पाई हैं। बढ़ती शिकायतों के बाद इनकम टैक्स विभाग ने स्पष्ट किया है कि ITR और AIS के डेटा में फर्क होने पर क्या करना चाहिए और गलतियों को कैसे सुधारा जा सकता है। विभाग ने इसको लेकर टैक्सपेयर्स के लिए नई गाइडेंस भी जारी की है।

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वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन जोरों पर है, लेकिन इस बार कई टैक्सपेयर्स के लिए यह प्रक्रिया परेशानी भरी साबित हो रही है। बड़ी संख्या में करदाताओं ने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में गलतियां होने की शिकायत की है। इसको देखते हुए आयकर विभाग ने आधिकारिक रूप से स्पष्टीकरण जारी करते हुए यह स्पष्ट किया है कि ITR और AIS में किसी तरह का अंतर होने पर क्या करना चाहिए और गलतियों को कैसे सुधारा जा सकता है।
AIS क्या है और क्यों जरूरी है ?
एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) इनकम टैक्स विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें आयकर अधिनियम 1961 के तहत करदाता से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां शामिल होती हैं। इस स्टेटमेंट को दो हिस्सों में बांटा गया है।
पहले हिस्से में टैक्सपेयर की बुनियादी जानकारियां होती हैं नाम, जन्म तिथि, पैन नंबर, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पता जैसी जानकारी। अगर टैक्सपेयर कोई कंपनी है, तो उसके नाम, स्थापना की तारीख और रजिस्ट्रेशन नंबर जैसी डिटेल शामिल होती हैं।
दूसरे हिस्से में करदाता के पूरे वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड रहता है। इसमें बैंक इंटरेस्ट, डिविडेंड से हुई आय, म्यूचुअल फंड में निवेश, रियल एस्टेट से जुड़े लेन-देन और विदेशी आय जैसे ट्रांजैक्शन्स दर्ज होते हैं। इस रिपोर्ट को देखकर टैक्स विभाग यह सुनिश्चित करता है कि ITR में दी गई जानकारी पूरी तरह सटीक और पारदर्शी है।
ITR और AIS में अंतर क्यों समस्या पैदा करता है ?
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि ITR और AIS के आंकड़ों में अंतर होने पर करदाताओं को नोटिस मिल सकता है, जुर्माना लगाया जा सकता है या रिफंड मिलने में देरी हो सकती है। इसलिए ITR फाइल करने से पहले फॉर्म 26AS और AIS को अच्छी तरह से मिलान करना बेहद जरूरी है।
टैक्सपेयर्स ने उठाई गलतियों की शिकायत :
इस बार कई करदाताओं को AIS में डुप्लीकेट एंट्री, गलत कैटेगरी में आय दर्ज होने और गलत ट्रांजैक्शन की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों में करदाता भ्रमित हो रहे हैं कि इन गलतियों को कैसे सुधारा जाए और ITR सही तरीके से दाखिल किया जाए।
इनकम टैक्स विभाग ने जारी की गाइडेंस :
करदाताओं की परेशानी को देखते हुए आयकर विभाग ने AIS पर फीडबैक देने की प्रक्रिया को और सरल बना दिया है। अब अगर आपको AIS में कोई गलत या अधूरी जानकारी दिखती है तो उसे तुरंत सुधारने के लिए इन चरणों का पालन करें:
- इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
- AIS सेक्शन में जाकर उस एंट्री को चुनें जिसमें गलती है।
- ‘Optional’ या ‘Add Feedback’ विकल्प पर क्लिक करें।
- सही कारण चुनें जैसे अमाउंट गलत है, यह मेरा ट्रांजैक्शन नहीं है या एंट्री डुप्लीकेट है।
- फीडबैक सबमिट कर दें।
अगर आपका फीडबैक सही पाया जाता है, तो AIS में तुरंत अपडेट कर दिया जाएगा। इसके बाद आप पोर्टल के माध्यम से यह ट्रैक कर सकते हैं कि आपका फीडबैक एक्सेप्ट हुआ है या रिजेक्ट।
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करदाताओं के लिए विशेषज्ञों की सलाह :
टैक्स कंसल्टेंट्स की मानें तो इस साल ITR फाइल करने से पहले फॉर्म 26AS और AIS का बारीकी से मिलान करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। छोटी सी गलती भी रिफंड में देरी या नोटिस का कारण बन सकती है। इसलिए सलाह दी जा रही है कि रिटर्न फाइल करने से पहले सभी आंकड़ों की अच्छी तरह से जांच कर लें।
आयकर विभाग का कहना है कि ITR और AIS में किसी भी तरह के अंतर को समय रहते ठीक करना करदाता की जिम्मेदारी है। विभाग की नई गाइडेंस से उम्मीद है कि इस बार करदाता बिना किसी बाधा के अपनी रिटर्न फाइल कर पाएंगे और अनावश्यक परेशानी से बच सकेंगे।

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