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चंदन मिश्रा की खौफनाक हत्या; दोस्त ने दिया अंजाम
By EditorialPublished on
पटना में अपराध की दुनिया को झकझोर देने वाली वारदात! बक्सर के कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा, जिस पर कई हत्याओं के आरोप थे, को उसके ही पुराने साथी शेरू ने पटना के पारस अस्पताल में गोलियों से भून डाला। धमकियों और दुश्मनी से भरी इस दुश्मनी का अंत अस्पताल की दीवारों के भीतर हुआ, जिसने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है।

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राजधानी पटना के नामी पारस अस्पताल में मंगलवार को फिल्मी अंदाज़ में हुई वारदात ने पूरे बिहार को हिला दिया। पांच हथियारबंद शूटर बेखौफ अस्पताल में घुसे, दूसरी मंज़िल के कमरे नंबर 209 में दाखिल हुए और वहां भर्ती मरीज पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। गोलियों की आवाज़ से मची अफरा-तफरी के बीच हमलावर बड़े इत्मीनान से मौके से फरार हो गए। जल्द ही खुलासा हुआ कि जिस शख्स को मौत के घाट उतारा गया, वह बक्सर का कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा था—वही अपराधी जिस पर दर्जनों हत्याओं के आरोप थे और जो हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहा था।
दोस्ती से दुश्मनी तक: चंदन और शेरू की कहानी :
इस सनसनीखेज़ हत्या के पीछे वही शख्स बताया जा रहा है, जो कभी चंदन का सबसे बड़ा साथी हुआ करता था—शेरू उर्फ ओंकार नाथ सिंह। दोनों की दोस्ती क्रिकेट मैदान पर हुई थी, लेकिन वक्त ने उन्हें जुर्म की दुनिया में धकेल दिया। 2009 में अनिल सिंह की हत्या से शुरू हुआ उनका खूनी सफर बक्सर और आसपास के जिलों में आतंक की कहानी लिखने लगा। दोनों ने 2011 में अकेले छह हत्याएं कीं, जिनमें रंगदारी न देने पर व्यापारी राजेंद्र केसरी की हत्या सबसे चर्चित रही।
यही वह मामला था जिसमें चंदन और शेरू गिरफ्तार हुए और उन्हें लंबी सज़ा मिली। चंदन को उम्रकैद हुई, जबकि शेरू की फांसी की सज़ा बाद में उम्रकैद में बदली गई। जेल में रहते हुए भी दोनों का खौफ कायम रहा, लेकिन पैसों और जातीय समीकरणों को लेकर दोस्ती में दरार पड़ गई। नतीजा—दोनों एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए।
अस्पताल में क्यों थी चंदन की मौजूदगी ?
चंदन मिश्रा इन दिनों पैरोल पर बाहर था। उसे पाइल्स की समस्या के चलते ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 18 जुलाई को उसकी पैरोल खत्म होनी थी, लेकिन इससे एक दिन पहले ही, 17 जुलाई को, शेरू गैंग के पांच शूटरों ने अस्पताल में घुसकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों के चेहरे मिले हैं, और उनकी तलाश के लिए एसटीएफ को जिम्मेदारी दी गई है।
सवालों के घेरे में बिहार की कानून व्यवस्था :
अस्पताल में हुई इस हाई-प्रोफाइल हत्या ने बिहार पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि 16 जुलाई को ही राज्य में "शूटर सेल" गठन करने का ऐलान किया गया था, और 24 घंटे से भी कम वक्त में शूटरों ने दूसरी बड़ी वारदात को अंजाम दे डाला। एडीजी का यह बयान कि "बिहार में मई, जून, जुलाई में हत्याएं होती ही हैं", कानून व्यवस्था पर और भी सवालिया निशान खड़े करता है।
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आगे क्या ?
शेरू अब भी जेल में बंद है, लेकिन उस पर आरोप है कि उसने गैंग के जरिए यह हत्या करवाई। बक्सर के इस कुख्यात गैंगवार ने न केवल अपराध जगत को बल्कि पूरे बिहार को झकझोर दिया है। अब सवाल यह है कि चंदन मिश्रा की हत्या के बाद शेरू और उसके गैंग का अगला निशाना कौन होगा और क्या पुलिस इस खूनी खेल को रोक पाएगी?

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