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20 दिन बाद BSF जवान की वापसी; भारत ने जताया संतोष
By EditorialPublished on
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक राहत की खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार साहू की सकुशल वतन वापसी हो गई है। पाकिस्तान ने उन्हें 21 दिन बाद

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5/14/2025 12:30:52 PM
भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक राहत की खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार साहू की सकुशल वतन वापसी हो गई है। पाकिस्तान ने उन्हें 21 दिन बाद रिहा कर अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए भारत को सौंप दिया।
कैसे पहुँचे थे पाकिस्तान?
बीएसएफ जवान पीके साहू 23 अप्रैल 2025 को ड्यूटी के दौरान गलती से पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे। पाकिस्तानी सेना ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया था। यह घटना उस समय हुई जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर था, खासकर भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद।
बीएसएफ की पुष्टि :
बीएसएफ ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, "आज बीएसएफ के जवान कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार साहू अटारी-वाघा बॉर्डर से भारत आ गए हैं। पूर्णम 23 अप्रैल 2025 को ड्यूटी के दौरान गलती से पाकिस्तानी सीमा में चले गए थे।" पीके साहू पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। उनके लापता होने के बाद उनकी पत्नी रजनी साहू ने चंडीगढ़ पहुँचकर बीएसएफ अधिकारियों से मुलाकात की थी और अपने पति की सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई थी। उनके लौटने की खबर ने पूरे परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ा दी।
भारत का ऑपरेशन सिंदूर और बढ़ता तनाव :
इस घटना के दौरान भारत और पाकिस्तान के संबंध काफी तनावपूर्ण हो चुके थे। दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके के 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया। इस सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ, हालांकि इसका असर पीके साहू की रिहाई पर नहीं पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जवान की वापसी भारत की कूटनीतिक सफलता को भी दर्शाती है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर हो, किसी जवान की शांति पूर्वक वापसी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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