24 सितंबर 2025 को लदाख में एक आंदोलन हुआ था। जिसमे लेह लदाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग हुई थी। यह आंदोलन सोनम वांगचुक ने किया था, जिसे GEN - Z ने पूर्ण समर्थन दिया था। यह आंदोलन कुछ समय के बाद अधिक तीव्र होते गया और फिर सोनम वांगचुक को लदाख पुलिस द्वारा गिरफ्दार कराया गया था। बाद में इस पुरे वारदात पर कोर्ट में सुनवाई जारी थी। ऐसे में ही 15 अक्टूबर 2025 बुधवार को सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो के याचिका पर होने वाली सुनवाई ताली गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2025 को होगी ऐसा न्यायलय ने कहा है। न्यायमूर्ति कुमार के अध्यक्षता के अंतर्गत स्थापन हुई पीठ ने मंगलवार के दिन गीतांजलि की ओर से सीनियर काउंसल कपिल सिब्बल द्वारा स्थगन की मांग की गई थी। इस मांग के बाद कोर्ट ने यह सुनवाई 15 अक्टूबर तक स्थगित कर दी थी। तभी सोनम वांगचुक के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से याचिका में संशोधन हेतु इजाजत मांगी थी। अब यह मांग पूरी करते हुए यह सुनवाई 29 अक्टूबर तक स्थगित कर दी गई है।

लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर दायर याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट 29 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ करेगी। वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर देशभर में विरोध के स्वर उठे थे, जिसके बाद अब अदालत से इस पर बड़ा फैसला आने की उम्मीद है।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और लेह प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था कि आखिर किन आधारों पर वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया। जवाब में लेह प्रशासन ने अदालत में कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी और आवश्यक थी, क्योंकि सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद ही यह कदम उठाया गया था।

लेह के जिलाधिकारी रोमिल सिंह डोंक ने अपने हलफनामे में बताया कि 26 सितंबर को हिरासत का आदेश जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि वह “इस बात से संतुष्ट थे और अब भी हैं” कि सोनम वांगचुक को हिरासत में रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, यह फैसला राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और समाज के लिए जरूरी सेवाओं की रक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था।

लेह प्रशासन ने यह भी कहा कि वांगचुक को अवैध रूप से हिरासत में लेने या उनके साथ किसी तरह के अनुचित व्यवहार के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 22 और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की धारा 8 में बताए गए नियमों के तहत की गई है। अब सबकी निगाहें 29 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि वांगचुक की हिरासत वैध थी या नहीं।




Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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