लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता और समाज सेवक सोनम वांगचुक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी हाल ही में लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 90 से अधिक लोग घायल हुए। वांगचुक पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगाया गया है, और उनके एनजीओ का विदेशी फंडिंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया।


लद्दाख पुलिस ने शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे वांगचुक को लेह से हिरासत में लिया , जब वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे थे। उनकी गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एनएसए के तहत की गई , और उन्हें एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। सरकार का आरोप है कि वांगचुक के भड़काऊ भाषणों, जैसे 'अरब स्प्रिंग' और 'नेपाल के Gen-Z प्रदर्शन' का जिक्र, ने प्रदर्शनकारियों को हिंसक बनाया।


वांगचुक ने हिंसा के दौरान शांति की अपील की थी और 10 सितंबर से शुरू हुए 15 दिन के व्रत को 24 सितंबर को तोडा। लेह में इस समय कर्फ्यू जारी किया गया है, जिसके चलते इंटरनेट सेवाएं, और स्कूल-कॉलेज 27 सितंबर तक बंद रहेंगे। गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वांगचुक के एनजीओ 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (सेकमोल) का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया।

पुलिस ने वांगचुक सहित कई लोगों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है, और जाँच जारी है। लद्दाख के सांसद हाजी हनीफा जां और कांग्रेस नेता गुलाम अहमद मीर ने गिरफ्तारी की निंदा की।


आंदोलन का नेतृत्व कर रही एपेक्स बॉडी लेह ने हिंसा से दूरी बनाई और कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है। कुछ रिपोर्टों में वांगचुक के 2018 के रेमन मैगसेसे अवॉर्ड और उनके पर्यावरण कार्यों का जिक्र किया गया। इस घटना की जानकारी के बाद बड़े स्तर पर लद्दाख की मांगों और केंद्र की प्रतिक्रिया पर बहस छिड़ी। सूत्रों के मुताबिक 24 सितंबर को प्रदर्शन हिंसक हो गए, जब बीजेपी कार्यालय पर हमला हुआ और गोलीबारी में 4 लोगों की मौत हुई।

X (ट्विटर ) पर मेहबूबा मुफ्ती, ओमर अब्दुल्ला ने तंज कस्ते हुए गिरफ्तारी को 'दुखद' और 'तानाशाही' बताया। इस विवाद के बाद लदाख की मांगों पर जल्द से जल्द बातचीत करना आवश्यक हो गया है। केंद्र सरकार को अपने दिए गए वादों को पूरा करने के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए इंटरनेट और कर्फ्यू जैसे प्रतिबंधों को कम करना जरूरी हो सकता है।


Updated On
Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story