109 साल पुरानी विरासत की कमान: संजीव सिंघल बने एस.डी. पब्लिक स्कूल के नए अध्यक्ष
नई दिल्ली के एस.डी. पब्लिक स्कूल की 109 वर्ष पुरानी विरासत को नई दिशा मिली है। प्रबंध समिति ने सर्वसम्मति से संजीव सिंघल को नया अध्यक्ष चुना। विद्यालय अब आधुनिक शिक्षा और संस्कारों पर जोर देगा।
तस्वीर में बाएं से संजीव सिंघल और उनके साथ स्कूल प्रबंध समिति के सदस्य नजर आ रहे हैं, जो एक कार्यक्रम के दौरान फूलों का गुलदस्ता थामे हुए हैं।
नई दिल्ली। एस.डी. पब्लिक स्कूल की 109 वर्ष पुरानी शैक्षिक विरासत को अब संजीव सिंघल के नेतृत्व का मार्गदर्शन मिलेगा। विद्यालय की प्रबंध समिति की बैठक में सर्वसम्मति से श्री संजीव सिंघल को विद्यालय का नया अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। समिति के सभी सदस्यों ने उनके कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता और मार्गदर्शन पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगा और अपनी ऐतिहासिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
संस्था के प्रबंधक एवं सचिव प्रदीप शरण, समिति सदस्य धीरजधर गुप्ता, सुभाष गोयल तथा पूर्व निगम पार्षद अशोक जैन ने संयुक्त रूप से बताया कि एस.डी. पब्लिक स्कूल की नींव वर्ष 1917 में लाला लक्ष्मण दास जी ने चीरा खाना, चांदनी चौक में रखी थी। शिक्षा के प्रसार और समाज को शिक्षित करने के उद्देश्य से शुरू हुआ यह प्रयास 109 वर्षों की सुदीर्घ यात्रा पूरी कर आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।
संस्था ने बीते एक दशक से अधिक समय में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ उच्च संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्य प्रदान किए हैं। प्रबंधकों के अनुसार, यह सामाजिक और शैक्षिक मिशन पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता रहा है।
संस्थापक लाला लक्ष्मण दास जी के निधन के बाद उनके सुपुत्र लाला बृजभूषण शरण जी ने इस मिशन को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया। वर्तमान में उनके पौत्र प्रदीप शरण जी अपने पूर्वजों की इस गौरवशाली परंपरा को निरंतर समृद्ध कर रहे हैं।
बैठक के दौरान विद्यालय के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्री भुवन मोहन जी के योगदान को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। समिति के सदस्यों ने कहा कि विद्यालय के विकास और प्रगति में उनके द्वारा दी गई समर्पित सेवाओं को सदैव सम्मान के साथ स्मरण किया जाएगा।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजीव सिंघल के नेतृत्व को लेकर प्रबंध समिति ने भरोसा जताया कि विद्यालय अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को सहेजते हुए आधुनिक शिक्षा, डिजिटल तकनीकों, चरित्र निर्माण और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में नई-नई उपलब्धियां हासिल करेगा। इस तरह 1917 में चांदनी चौक से शुरू हुई संस्था की शैक्षिक यात्रा अब नई नेतृत्व व्यवस्था के साथ आगे बढ़ेगी।