तस्वीर में सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में पीले रंग का बुलडोजर एक क्षतिग्रस्त इमारत के पास मलबा हटाता हुआ दिख रहा है।

लखनऊ/सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में बनी कथित अवैध मस्जिद को अदालत के आदेश के बाद गिराए जाने की कार्रवाई से प्रदेश की सियासत गरमा गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध घोषित कर गिराने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करना एक धर्मनिरपेक्ष सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे विवादों का समाधान आपसी सहमति और अन्य कानूनी रास्तों से किया जाना चाहिए। मायावती ने आरोपियों के घरों को गिराकर पूरे परिवार को सजा देने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए।

वहीं, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को कानून और संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में शांत नहीं बैठेंगे और कानून के दायरे में रहते हुए उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) से लेकर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रिम कोर्ट) तक लड़ाई लड़ेंगे।

प्रशासन के अनुसार, ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अदालत के आदेश और विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है। सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, गत 17 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित इस ढांचे को सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण माना था और इसे गिराने का आदेश दिया था। अदालत ने करीब 6.41 करोड़ रुपये के मुआवजे का भी फैसला सुनाया था।

इस आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की। प्रशासन की ओर से इसे अदालत के आदेशों के अनुपालन में की जा रही कार्रवाई बताया गया है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे सहारनपुर जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों और हॉटस्पॉट्स पर अतिरिक्त पीएसी और आरएएफ की कंपनियां तैनात की गई हैं। पुलिस प्रशासन सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर भी पैनी नजर रख रहा है, ताकि क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे। अदालत के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई ने जहां विधिक प्रक्रिया को केंद्र में ला दिया है, वहीं मायावती और इमरान मसूद के विरोध से मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है।

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