तस्वीर में एक व्यक्ति मेज पर रखे पासपोर्ट और स्कूल प्रमाणपत्र की जांच कर रहा है। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के चरथावल थाना क्षेत्र के ग्राम नगला राई से फर्जी दस्तावेज तैयार कर जन्मतिथि और माता-पिता का नाम कथित रूप से बदलवाने तथा धोखाधड़ी से पासपोर्ट हासिल कर युवक को विदेश भेजने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर मुजफ्फरनगर पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस को दिए आवेदन पत्र में शिकायतकर्ता अमित कुमार पुत्र संसार सिंह, निवासी ग्राम अलीपुर कलां, मुजफ्फरनगर ने आरोप लगाया है कि ग्राम नगला राई निवासी एक ही परिवार के कई सदस्यों ने मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। नामजद आरोपियों में इश्तियाक, इंतजार, इत्तेखार, तोसीक, गुलजार (सभी पुत्रगण यूसुफ), अब्दुल रहमान पुत्र तोसीक और मासूम पुत्र इंतजार शामिल हैं। आरोप है कि सभी ने आपस में सांठगांठ कर सरकारी कार्यालयों को गुमराह किया और कूटरचित कागजात के आधार पर फैजान पुत्र गुलजार का पासपोर्ट बनवाया।

मामले में सबसे बड़ा अंतर फैजान की जन्मतिथि को लेकर सामने आया है। जय हिंद इंटर कॉलेज के शैक्षिक अभिलेखों की पड़ताल के अनुसार, स्कूल के एसआर नंबर 23811 में फैजान का कक्षा 9 में दाखिला दर्ज है और उसकी जन्मतिथि 01 जनवरी 2006 दर्ज की गई है। स्कूल रिकॉर्ड में पिता का नाम रिजवान और माता का नाम जुलेखा दर्ज है। बाद में कक्षा 11 में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण स्कूल से उसका नाम काट दिया गया था।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के सहारे 27 जनवरी 2023 को जारी पासपोर्ट संख्या X5729271 में फैजान की जन्मतिथि बदलकर 15 दिसंबर 2001 दर्ज कराई गई। वहीं, अमित कुमार के अनुसार फैजान के वास्तविक पिता का नाम गुलजार और माता का नाम साज्जो है। इस तरह शैक्षिक अभिलेखों और पासपोर्ट में दर्ज विवरणों में जन्मतिथि तथा माता-पिता के नाम को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है।

शिकायतकर्ता अमित कुमार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार वर्मा से मुलाकात कर पत्र सौंपा और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गोपनीय जांच कराने का अनुरोध किया। उन्होंने फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।

शिकायत के आधार पर चरथावल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शैक्षिक अभिलेखों और पासपोर्ट में दर्ज विवरणों में इतना बड़ा अंतर कैसे आया और पासपोर्ट केंद्र में जमा किए गए दस्तावेज किन स्रोतों से तैयार कराए गए थे। मामले से जुड़े स्कूल रिकॉर्ड्स और पासपोर्ट वेरिफिकेशन फाइलों का भी गहन सत्यापन किया जा रहा है। जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने और युवक को विदेश भेजने की पूरी प्रक्रिया कैसे अंजाम दी गई।

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