मुजफ्फरनगर में BKU की महापंचायत: राकेश टिकैत ने रखी 16 सूत्रीय मांगे
भाकियू की महापंचायत में गन्ने का भाव 500 रुपये करने, मुफ्त बिजली और फसल बीमा समीक्षा समेत 16 मांगें उठाई गईं; 23 अक्टूबर को लखनऊ में पंचायत का ऐलान।
मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में भाकियू महापंचायत के दौरान मंच से बोलते राकेश टिकैत।
मुजफ्फरनगर। राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में भारतीय किसान यूनियन की पहली रात की महापंचायत शुक्रवार तड़के सुबह पांच बजे संपन्न हुई। पूरी रात चली इस महापंचायत में किसानों ने फसल का उचित मूल्य, बिजली, खाद, गलत मुकदमे, आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान, बाढ़ और कृषि ऋण समेत अपनी प्रमुख समस्याएं उठाईं। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर 16 सूत्रीय मांगें प्रमुखता से रखीं और कहा कि जब तक केंद्र व यूपी सरकार इन मांगों का समाधान नहीं करती, किसानों का आंदोलन चलता रहेगा। उन्होंने ऐलान किया कि आगामी 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना भवन पर पंचायत होगी और किसानों से इसकी तैयारी में अभी से जुटने का आह्वान किया।
महापंचायत में राकेश टिकैत ने किसानों के लिए लाभकारी मूल्य और प्रभावी खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करने, सभी प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद मजबूत करने और खरीद केंद्रों पर पारदर्शिता बरतने की मांग की। उन्होंने गन्ने के लाभकारी मूल्य को 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और चीनी मिलों पर बकाया भुगतान तत्काल करने की मांग उठाई। कृषि नलकूपों को पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने को बिजली समस्या के स्थायी समाधान के रूप में रखा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में वोल्टेज की समस्या, बार-बार ट्रिपिंग और अनियमित विद्युत आपूर्ति दूर करने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि बुवाई के समय किसानों को खाद के लिए घंटों कतार में खड़ा न होना पड़े, इसके लिए डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक कृषि आदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उत्तराखंड के खानपुर के विधायक उमेश शर्मा ने कहा कि सरकारें किसान संगठनों को कमजोर करने का काम करती रही हैं। किसानों का सबसे अधिक शोषण सरकारें ही करती हैं। उन्होंने कहा कि चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन सरकार गन्ने का भाव उसके अनुपात में नहीं दे रही। विधायक ने कहा कि उत्तराखंड में भी किसानों का सर्वाधिक शोषण हो रहा है। हरिद्वार प्रदेश में सर्वाधिक राजस्व देने वाला जिला है, लेकिन वहां के किसानों की सरकार को कोई चिंता नहीं है। उन्होंने किसानों की गिरती हालत पर ध्यान देने की बात कहते हुए उत्तराखंड में भाकियू के बड़े आंदोलन का आह्वान किया।
राकेश टिकैत ने आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने ग्राम स्तर पर प्रभावी व्यवस्था बनाकर इस समस्या का स्थायी समाधान करने और गौशालाओं के संचालन की नियमित निगरानी की मांग की। प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, सूखा और आंधी से हुए नुकसान का तत्काल मुआवजा देने की मांग भी उठाई गई। फसल बीमा योजना को सरल और पारदर्शी बनाने तथा वास्तविक नुकसान के आधार पर बीमा राशि का भुगतान निर्धारित समय में सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए नहरों की समय पर सफाई और टेल तक पानी पहुंचाने की मांग की गई। बंद पड़े सरकारी नलकूपों को तत्काल चालू कराने और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने पर बल दिया गया। कृषि ऋण से जुड़ी समस्याओं को लेकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऋण पुनर्गठन और राहत की प्रभावी व्यवस्था की बात कही गई। कठोर वसूली की कार्रवाई से पहले किसानों की वास्तविक आर्थिक स्थिति का संज्ञान लेने का आग्रह किया गया।
मंडियों में किसानों के शोषण को रोकने के लिए पारदर्शी तौल, उचित मूल्य और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। किसानों की उपज औने-पौने दामों पर खरीदने वाले बिचौलियों और अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई की बात कही गई।
राकेश टिकैत ने किसान आंदोलनों और किसानों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा और उचित मामलों में मुकदमे वापस लेने की कार्रवाई की मांग भी की। शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले किसानों का अनावश्यक उत्पीड़न नहीं करने पर जोर दिया गया। कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत, जैसे डीजल, बिजली, खाद, बीज, कीटनाशक और कृषि मशीनरी को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई, ताकि किसान की वास्तविक आय पर बढ़ते लागत भार को कम किया जा सके।
प्रदेश सरकार द्वारा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक करने और किसानों से संबंधित नीतिगत निर्णयों से पहले उनसे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और सुझावों को शामिल करने की मांग की गई।
पुरकाजी क्षेत्र की बड़ी आबादी और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इसे पूर्ण तहसील बनाने पर जोर दिया गया। मुजफ्फरनगर के डूब क्षेत्र खादर में सोनाली नदी पर बांध बनाने और पुरकाजी को तहसील का दर्जा देने की मांग की गई। प्रत्येक वर्ष जल-भराव के कारण बाढ़ आती है, जिससे दर्जनों गांवों की हजारों हेक्टेयर भूमि डूब जाती है और किसानों को भारी नुकसान पहुंचता है। बाढ़ से बचाव के लिए खादर क्षेत्र की सोनाली नदी पर बांध निर्माण की मांग उठाई गई। खादर क्षेत्र में सोनाली नदी के उफान से दर्जनों गांवों की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि जलमग्न हो जाती है। भाकियू ने नदी पर मजबूत बांध बनाकर किसानों को स्थायी राहत देने की मांग की।
महापंचायत में कृषि कार्य के लिए निशुल्क बिजली तथा सभी घरेलू एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट निशुल्क बिजली उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। बिजली बिल 2025, स्मार्ट मीटर व्यवस्था और बिजली निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने की मांग की गई। किसानों एवं मजदूरों के हितों के विरुद्ध चारों श्रम संहिताएं, बीज विधेयक, राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति और राष्ट्रीय सहकारिता नीति वापस लेने की मांग की गई। डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सब्सिडी बहाल करने की मांग भी उठाई गई।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की व्यापक समीक्षा कर सार्वजनिक क्षेत्र आधारित पारदर्शी फसल एवं पशुधन बीमा व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। वीबी जीराम जी के अंतर्गत 200 दिन का रोजगार तथा न्यूनतम 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग रखी गई। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि, भूस्खलन, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर प्रभावित किसानों, बंटाईदारों और कृषि मजदूरों को समुचित मुआवजा देने की मांग की गई।
भूमि अधिग्रहण, बेदखली और बुलडोजर कार्रवाई किसानों एवं ग्रामीण परिवारों के पुनर्वास के बिना नहीं करने तथा भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का सख्ती से पालन कराने की मांग भी महापंचायत में रखी गई।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित किसी भी ऐसे मुक्त व्यापार समझौते को स्वीकार नहीं करने की मांग की गई, जिससे भारतीय कृषि, डेयरी, एमएसपी व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद और ग्रामीण रोजगार प्रभावित होते हों। डेयरी क्षेत्र में विदेशी दुग्ध उत्पादों के अनियंत्रित आयात पर रोक लगाकर देश के करोड़ों दुग्ध उत्पादक परिवारों के हितों की रक्षा करने की मांग भी उठाई गई।
रातभर चली महापंचायत में उठाई गई इन मांगों के साथ राकेश टिकैत ने 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना भवन पर पंचायत का ऐलान किया। भाकियू ने केंद्र और यूपी सरकार से मांगों के समाधान की मांग दोहराते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही।