हापुड़ में ₹50.62 करोड़ की फर्जी बिलिंग का खुलासा, आरके ट्रेडर्स पर ₹13.27 करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप
हापुड़ के पिलखुवा में आरके ट्रेडर्स की जांच में ₹50.62 करोड़ का फर्जी टर्नओवर और ₹13.27 करोड़ की कथित टैक्स चोरी सामने आई है। चार राज्यों से जुड़ी संदिग्ध आईटीसी, फर्म के पते और संचालक की भूमिका की जांच तेज हो गई है।
पिलखुवा में फर्जी आईटीसी और टैक्स चोरी के मामले में सीजीएसटी विभाग की जांच पड़ताल।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के पिलखुवा में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और टैक्स चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग और विशेष अनुसंधान शाखा, गाजियाबाद की जांच में 'आरके ट्रेडर्स' नाम की ऐसी फर्म का खुलासा हुआ है, जिसने कागजों पर ₹50.62 करोड़ रुपये का कारोबार दर्शाया, जबकि मौके पर उसका कोई अस्तित्व नहीं मिला। विभागीय जांच में फर्म के जरिए ₹13.27 करोड़ रुपये की कथित कर चोरी का मामला सामने आया है।
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, आरके ट्रेडर्स ने 27 मई 2026 को जीएसटी पंजीकरण कराया था। पंजीकरण के दौरान फर्म ने अपने कारोबार का विवरण बुने हुए अथवा क्रोशिया से तैयार कपड़ों के व्यापार के रूप में दिया था। फर्म का घोषित पता ग्राउंड फ्लोर, 478, खेड़ा बस स्टैंड, मेन रोड, पिलखुवा, जनपद हापुड़ दर्ज किया गया था।
हालांकि, 4 नवंबर 2026 को विशेष अनुसंधान शाखा, रेंज-बी गाजियाबाद की जांच टीम जब इस पते पर पहुंची तो वहां फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला। मौके पर खाली जमीन मिली। आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर भी आरके ट्रेडर्स नाम की किसी फर्म के वहां संचालित होने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद फर्म के घोषित कारोबार और जीएसटी लेनदेन की जांच की गई।
जांच में सामने आया कि मई 2026 से नवंबर 2026 के बीच आरके ट्रेडर्स ने महज कुछ महीनों में कागजों पर ₹50.62 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्शाया था। इस कारोबार के आधार पर करीब ₹11.85 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी बनी, जिसे कथित तौर पर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए समायोजित कर लिया गया। फर्म के कारोबार और दर्ज किए गए लेनदेन में सामने आई विसंगतियों के बाद विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरके ट्रेडर्स ने अलग-अलग राज्यों में पंजीकृत संदिग्ध फर्मों से कुल ₹11.44 करोड़ रुपये की आईटीसी हासिल की थी। इसमें राजस्थान की फर्मों से ₹5.33 करोड़ रुपये, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) की फर्म से ₹2.23 करोड़ रुपये, जम्मू-कश्मीर की फर्मों से ₹2.15 करोड़ रुपये और मेरठ (उत्तर प्रदेश) की फर्म से ₹1.71 करोड़ रुपये की आईटीसी शामिल है।
दस्तावेजों की जांच में यह भी सामने आया कि आरके ट्रेडर्स ने कथित तौर पर इस बोगस आईटीसी को आगे दिल्ली की फर्मों को हस्तांतरित कर दिया। इससे मामले के अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े होने की जानकारी मिली है। इसके अतिरिक्त, फर्म की ओर से ₹1.83 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आईटीसी का दावा करते हुए रिटर्न दाखिल करने का मामला भी सामने आया है।
फर्म के स्वामी अमित कुमार से संपर्क करने के लिए जांच अधिकारियों ने जीएसटी पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया, लेकिन उनका फोन लगातार बंद मिला। अधिकारियों का फर्म संचालक से संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद राजस्व की सुरक्षा के मद्देनजर विभाग ने कार्रवाई करते हुए आरके ट्रेडर्स के क्रेडिट लेजर में उपलब्ध ₹62.19 लाख रुपये की आईटीसी ब्लॉक कर दी।
विभाग ने फर्म का जीएसटी पंजीकरण निरस्त कराने के लिए केंद्रीय प्राधिकरण को पत्र भी भेजा है। इसके साथ ही फर्म स्वामी अमित कुमार के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
विशेष अनुसंधान शाखा, रेंज-बी गाजियाबाद के उपायुक्त विमल कुमार और राज्यकर अधिकारी सतीश त्रिपाठी के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। विभाग अब केवल आरके ट्रेडर्स के लेनदेन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी फर्मों की भूमिका की जांच कर रहा है, जिनसे कथित तौर पर बोगस आईटीसी प्राप्त की गई और जिन्हें आगे हस्तांतरित किया गया।
इस संबंध में संबंधित राज्यों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजे जा रहे हैं। फिलहाल, ₹50.62 करोड़ रुपये के कागजी कारोबार, ₹11.44 करोड़ रुपये की संदिग्ध आईटीसी और ₹13.27 करोड़ रुपये की कथित कर अपवंचन से जुड़े इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के साथ अंतरराज्यीय कारोबारी संपर्कों की जांच जारी है।