डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर हापुड़ कोतवाली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बेहतर कानून-व्यवस्था और सामाजिक सेवाओं के लिए प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार (दाएं) को शील्ड भेंटकर सम्मानित करते सैफी सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष निजामुद्दीन सैफी और प्रतिनिधिमंडल।

हापुड़ (उत्तर प्रदेश) में देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर सैफी सेवा फाउंडेशन (रजि.) ने सामाजिक सेवा और प्रशासनिक समन्वय का संदेश देते हुए हापुड़ कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार को सम्मानित किया। फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं पत्रकार निजामुद्दीन सैफी के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें उत्कृष्ट सामाजिक एवं प्रशासनिक सेवाओं के लिए संस्था का प्रतीक चिह्न (शील्ड) भेंट किया।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती संस्था की ओर से श्रद्धापूर्वक एवं हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर सैफी सेवा फाउंडेशन ने समाज और प्रशासन के बीच समन्वय को बढ़ावा देने की पहल करते हुए हापुड़ कोतवाली में प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार का नागरिक अभिनंदन किया। क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से किए जा रहे कार्यों की सराहना भी की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फाउंडेशन के अध्यक्ष निजामुद्दीन सैफी ने कहा, "डॉ. अब्दुल कलाम जी का जीवन हर नागरिक, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश की सेवा, शिक्षा और युवाओं को सही राह दिखाने में समर्पित कर दिया। हमारी संस्था उनके बताए आदर्शों पर चलते हुए समाज सेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाती रहेगी।"

इस दौरान पुलिस प्रशासन की बेहतर कार्यप्रणाली और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों की जमकर सराहना की गई। संस्था की ओर से प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार को शील्ड भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. कलाम के आदर्शों को याद करने के साथ ही समाज सेवा और प्रशासन के बीच सकारात्मक समन्वय का संदेश दिया गया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम में पत्रकार अमन त्यागी, पत्रकार आदिल सिद्दीकी, पत्रकार गुलफाम सैफी, पत्रकार सुहेल सैफी, शौकीन सैफी (एल्यूमीनियम वाले), डॉ. सुलेमान सैफी सहित संस्था के कई गणमान्य लोग एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी उपस्थित लोगों ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया।

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