रायपुर में चिकित्सकों की टीम अजगर के मुंह से ट्यूमर निकालने की जटिल सर्जरी प्रक्रिया के दौरान जांच करते हुए। Image generated by AI for illustrative purposes.   

छत्तीसगढ़ में वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम ने एक विशालकाय अजगर के मुंह से 200 ग्राम वजनी ट्यूमर निकालकर उसकी जान बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। ट्यूमर के कारण अजगर को भोजन निगलने और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए पशु सर्जनों की विशेष टीम गठित की गई, जिसने लगभग डेढ़ घंटे तक चले ऑपरेशन में ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया।

रायपुर (छत्तीसगढ़)। रेस्क्यू किए गए विशालकाय अजगर की शारीरिक जांच के दौरान उसके मुंह के अंदर बड़ा उभार दिखाई दिया। जांच में सामने आया कि ट्यूमर का आकार इतना बढ़ चुका था कि वह अजगर की भोजन नली और सांस की नली पर दबाव डाल रहा था। इसके चलते अजगर कई दिनों से भोजन नहीं कर पा रहा था और उसे सांस लेने में भी भारी तकलीफ हो रही थी। उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने सर्जरी का निर्णय लिया।

सरीसृपों की सर्जरी में बेहोशी की दवा की सही मात्रा निर्धारित करना चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा होता है। दवा की मात्रा में थोड़ा सा भी असंतुलन जानलेवा साबित हो सकता है। इस जोखिम को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने बेहद सावधानी के साथ अजगर को बेहोशी की दवा दी। इसके बाद लगभग डेढ़ घंटे तक चले सूक्ष्म ऑपरेशन के दौरान उसके मुंह से 200 ग्राम वजनी ट्यूमर को पूरी तरह काटकर अलग कर दिया गया।

ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों ने अजगर के मुंह में बने घाव की सिलाई की। संक्रमण और दर्द से बचाव के लिए उसे एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं दी जा रही हैं। फिलहाल अजगर को विशेष निगरानी वार्ड में रखा गया है, जहां उसकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है।

चिकित्सकों के अनुसार, पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद अजगर को जंगल में छोड़ने की योजना है। डॉक्टरों की मंजूरी मिलने पर उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी सुरक्षित जंगल में वापस छोड़ा जाएगा। मुंह में ट्यूमर के कारण भोजन और सांस लेने में असमर्थ हो चुके अजगर का सफल ऑपरेशन वन्यजीव चिकित्सा के लिहाज से एक दुर्लभ मामला है।

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