चंदौली के लक्ष्मी चैरिटेबल हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, परिजनों का हंगामा
चंदौली के चकिया स्थित लक्ष्मी चैरिटेबल हॉस्पिटल में पथरी के ऑपरेशन के दौरान 60 वर्षीय महिला की मौत से हड़कंप मच गया है। परिजनों ने गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए अस्पताल को सील करने और एफआईआर की मांग की है। क्या वाकई स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी से अस्पताल चल रहा था?
चंदौली के चकिया स्थित लक्ष्मी चैरिटेबल हॉस्पिटल के बाहर शव के साथ बैठे परिजन और ग्रामीण।
चंदौली जनपद के चकिया स्थित लक्ष्मी चैरिटेबल हॉस्पिटल में पथरी का ऑपरेशन कराने वाली 60 वर्षीय महिला की मौत के बाद रविवार को अस्पताल के बाहर जबरदस्त हंगामा हुआ। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, अस्पताल को तत्काल सील करने और मृतका के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
मृतका की पहचान चकिया कोतवाली क्षेत्र के नेवाजगंज निवासी मालती देवी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मालती देवी को शनिवार को पथरी के ऑपरेशन के लिए उक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद ही महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा समय रहते न तो उचित इलाज उपलब्ध कराया गया और न ही आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं दी गईं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई।
रविवार को पोस्टमार्टम के बाद जब शव को अस्पताल के बाहर लाया गया तो परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। परिजनों की मांग थी कि जब तक प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होती, अस्पताल को सील नहीं किया जाता और मुआवजा नहीं मिलता, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिजनों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश की थी, जिसका उन्होंने कड़ा विरोध किया। साथ ही, परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि अस्पताल बेसमेंट में संचालित किया जा रहा है, जिसकी सुरक्षा मानकों और वैधता की गहन जांच होनी चाहिए।
मामले की सूचना पाकर चकिया कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से लंबी वार्ता की, जिसके बाद पुलिस की उपस्थिति में शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो पहले भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस अस्पताल को बेसमेंट में संचालन के लिए नोटिस जारी किया गया था और उस समय इसे बंद भी कराया गया था। यदि अस्पताल दोबारा उसी स्थान पर संचालित हो रहा था, तो यह विभागीय निगरानी की विफलता को दर्शाता है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की गहन जांच में जुटे हैं, ताकि चिकित्सकीय लापरवाही और अन्य आरोपों की सच्चाई सामने आ सके। परिजनों ने अस्पताल की मान्यता, ऑपरेशन थिएटर, संसाधनों और अग्नि सुरक्षा जैसे मानकों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।