फसलों के उचित मूल्य की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति ने बुलंदशहर में प्रदर्शन किया।

फसलों के उचित मूल्य और किसानों के आर्थिक हितों से जुड़ी मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति ने शनिवार को बुलंदशहर में जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय कार्यालय से हजारों किसानों ने हाथों में गन्ना लेकर करीब चार किलोमीटर लंबी पैदल रैली निकाली। किसानों ने गन्ने का समर्थन मूल्य 700 रुपये प्रति कुंतल, गेहूं का 5000 रुपये प्रति कुंतल और आलू का 2500 रुपये प्रति कुंतल घोषित करने की मांग उठाई। रैली के माध्यम से किसानों ने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए शक्ति प्रदर्शन किया।

भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति की ओर से जिलाधिकारी बुलंदशहर के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भेजा गया। इसमें प्रमुख रूप से गन्ने का समर्थन मूल्य 700 रुपये प्रति कुंतल, गेहूं का समर्थन मूल्य 5000 रुपये प्रति कुंतल और आलू का समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति कुंतल करने की मांग शामिल रही। इसके अलावा खेती-किसानी के लिए बैंकों से लिए गए ऋण का संपूर्ण ब्याज माफ करने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई।

प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि किसान सरकार से कोई भीख नहीं मांग रहा, बल्कि अपनी मेहनत और पसीने की कमाई का उचित हक मांग रहा है। किसान दिन-रात खेतों में मेहनत करके देश का पेट भरता है, लेकिन फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने पर उसके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में सरकार को किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लेना चाहिए।

किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार किसानों की मांगों को स्वीकार करती है तो प्रदेश का किसान सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपना आशीर्वाद देगा। वहीं, मांगों को अनसुना किए जाने पर किसानों में नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि किसानों की आवाज को अब नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

रैली के दौरान भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने अनुशासन बनाए रखने पर भी जोर दिया। संगठन की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसान यूनियन सड़क जाम करने वाला संगठन नहीं है और न ही प्रशासन के लिए अनावश्यक परेशानी खड़ी करना चाहता है। संगठन के कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और अनुशासन के दायरे में रहकर धरना-प्रदर्शन करते हैं।

हजारों किसानों की मौजूदगी और करीब चार किलोमीटर लंबी पैदल रैली के जरिए भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति ने फसलों के उचित मूल्य की मांग को प्रमुखता से उठाया। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसानों के हक और उनकी फसलों के उचित मूल्य का मुद्दा अब केवल मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि किसान सम्मान और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

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