बुलंदशहर के कृषि उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार, ‘खुर्जा की खुरचन’ के जीआई पंजीकरण की तैयारी तेज
बुलंदशहर में कृषि निर्यात क्लस्टरों के गठन की तैयारी तेज हो गई है। बासमती धान के तीन क्लस्टर घोषित, आलू और मक्का के क्लस्टर एक माह में तैयार करने का लक्ष्य। ‘खुर्जा की खुरचन’ के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।
मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में कृषि निर्यात क्लस्टर सुविधा इकाई की समीक्षा बैठक आयोजित हुई।
जनपद के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए प्रशासन ने कृषि निर्यात क्लस्टरों के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। बासमती धान के तीन कृषि निर्यात क्लस्टर घोषित किए जा चुके हैं, जबकि आलू और मक्का के निर्यात क्लस्टर एक माह के भीतर तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही खुर्जा की प्रसिद्ध मिठाई ‘खुर्जा की खुरचन’ को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पहचान दिलाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश कृषि निर्यात नीति-2019 के अंतर्गत गठित कृषि निर्यात क्लस्टर सुविधा इकाई (CFU) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बासमती धान, आलू, आम, मक्का और सरसों सहित विभिन्न कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक ने बताया कि बासमती धान के लिए निर्धारित तीन लक्ष्यों के सापेक्ष तीन कृषि निर्यात क्लस्टरों का गठन किया जा चुका है। इनमें पीएसजेजी एफपीओ, सात्विक बायो एनर्जी एफपीओ और अल्फान्सो सयाना मैंगो वैरायटी एफपीओ शामिल हैं। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद इन क्लस्टरों को राज्य स्तरीय समिति द्वारा घोषित किया जा चुका है।
कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अब तक बासमतीनेट पोर्टल पर 37 किसानों और हार्टीनेट पोर्टल पर 31 किसानों का पंजीकरण कराया गया है। वहीं, बासमती जीआई के अधिकृत उपयोगकर्ता के रूप में कृषि विभाग द्वारा 37 किसानों के आवेदन तथा मंडी समितियों के माध्यम से व्यापारियों के 192 आवेदन प्राप्त कर पूर्ण कराए गए हैं।
‘खुर्जा की खुरचन’ को जीआई पहचान दिलाने की तैयारी
बैठक में खुर्जा की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई ‘खुर्जा की खुरचन’ के जीआई पंजीकरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। इसके लिए गठित समिति का प्रस्ताव तकनीकी फैसिलिटेटर पद्मश्री डॉ. रजनीकांत द्विवेदी के स्तर पर अग्रिम कार्रवाई के लिए प्रक्रियाधीन है।
जीआई पहचान मिलने से खुर्जा की इस पारंपरिक मिठाई को विशिष्ट पहचान मिलने के साथ व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। प्रशासन की ओर से इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग ले रहे बुलंदशहर के एफपीओ
बैठक में बताया गया कि जनपद के एफपीओ, जिनमें सात्विक बायो और आयाम प्रोजेक्ट्स आदि शामिल हैं, यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो, इंडसफूड, गल्फ फूड दुबई और फ्रूट लोजिस्टिका जर्मनी जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में सहभागिता कर रहे हैं।
इसके अलावा एफपीओ प्रतिनिधियों को नीयाम जयपुर, मैनेज हैदराबाद और जैन इरिगेशन जलगांव में एक्सपोजर विजिट और निर्यात संबंधी प्रशिक्षण भी दिया गया है।
बैठक में नागर बंधु फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और पुष्प रस फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। नागर बंधु एफपीओ के प्रतिनिधि ने बताया कि क्लस्टर के लिए पूर्व में प्रस्तावित क्षेत्रफल में जो भूमि कम रह गई थी, उसे जल्द पूरा किया जाएगा। इसके बाद आलू और मक्का दोनों के कृषि निर्यात क्लस्टर का प्रस्ताव एक माह के भीतर तैयार कर विभाग को भेज दिया जाएगा।
एपीडा ने निर्यात प्रक्रिया और तकनीकी योजनाओं की दी जानकारी
एपीडा (APEDA) के प्रतिनिधि मुकेश कुमार ने कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित विभिन्न वित्तीय और तकनीकी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने एफपीओ के माध्यम से निर्यात बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और आधुनिक पैकेजिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने उपस्थित अधिकारियों और हितधारकों को हार्टीनेट पंजीकरण, आयात-निर्यात कोड (IEC) तथा आरसीएमसी (RCMC) प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई। साथ ही गुणवत्ता सुरक्षा मानकों, ट्रैसेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी साझा की।
लंबित कृषि निर्यात क्लस्टरों के गठन में तेजी लाने के निर्देश
मुख्य विकास अधिकारी ने लंबित कृषि निर्यात क्लस्टरों के गठन में तेजी लाने के निर्देश दिए। कृषि विभाग को मक्का और सरसों के लिए तथा उद्यान विभाग को आलू, आम और ताजी हरी सब्जियों के लिए आवंटित निर्यात क्लस्टर जल्द से जल्द तैयार करने को कहा गया।
ज्येष्ठ कृषि विपणन निरीक्षक को संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय स्थापित करने, क्लस्टर गठन में आ रही बाधाओं की समीक्षा करने और निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में कृषि विपणन, कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारी, एपीडा प्रतिनिधि और विभिन्न एफपीओ के पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन की इस पहल के तहत बासमती धान के तीन क्लस्टरों की घोषणा के बाद अब आलू, मक्का, आम, सरसों और ताजी हरी सब्जियों के निर्यात क्लस्टरों के गठन पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, ‘खुर्जा की खुरचन’ के जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। इन प्रयासों के माध्यम से जनपद के किसानों और कृषि उत्पादक संगठनों को अपने उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का अवसर मिलने की उम्मीद है।