32 फीट के स्वर्ण-रजत हिंडोले में झूले बांकेबिहारी, हरे श्रृंगार से मोहा भक्तों का मन
वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में हरियाली तीज पर 32 फीट के स्वर्ण-रजत हिंडोले में ठाकुरजी विराजमान हुए। हरे श्रृंगार, सावन की सजावट और जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
तस्वीर में वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में स्वर्ण-रजत निर्मित हिंडोले में हरे रंग की पोशाक में विराजमान ठाकुर बांकेबिहारी और सेवादार नजर आ रहे हैं।
मथुरा के वृंदावन स्थित जग प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में शनिवार को हरियाली तीज का पावन पर्व हिंडोला उत्सव के रूप में प्रतिवर्ष की भांति हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर भक्तों ने स्वर्ण-रजत निर्मित हिंडोले में विराजमान ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन कर स्वयं को धन्य किया। ब्रज के सभी प्रमुख मंदिरों में हरियाली तीज पर झूलनोत्सव के तहत झूले सजाकर ठाकुरजी को झूला झुलाने की प्राचीन परंपरा है, लेकिन ब्रज की प्रसिद्ध हरियाली तीज की विशेष धूम जग प्रसिद्ध बांकेबिहारी मंदिर में दिखाई दी।
प्रातःकाल ठाकुर बांकेबिहारी लाल को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालकर करीब 32 फीट चौड़े और 12 फीट ऊंचे विशाल स्वर्ण-रजत निर्मित हिंडोले में विराजमान कराया गया। उनके दोनों ओर खड़ी सखियां प्रतीकात्मक रूप से उन्हें झूला झुला रही थीं। हरियाली तीज पर हरे रंग के महत्व को देखते हुए ठाकुरजी और सखियों को हरे रंग की विशेष पोशाक धारण कराई गई। मंदिर में सावन का एहसास कराने के लिए सावन के सभी रंगों से सजावट की गई।
इस अवसर पर ठाकुरजी को पर्व की विशेष मिठाई घेवर-फैनी का भोग भी अर्पित किया गया। ठाकुरजी की थकान मिटाने यानी विश्राम के लिए सुख सेज भी सजाई गई। प्राचीन मान्यता के अनुसार मंदिर बंद होने के बाद ठाकुरजी को यहां विश्राम कराया जाता है।
मंदिर के आंतरिक परिसर में हिंडोले की तैयारियां पूरी होने के बाद प्रातः 6.30 बजे दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए। इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे भक्त उत्साह और उमंग के साथ मंदिर के अंदर प्रवेश करने लगे।
भक्तों ने जब अपने आराध्य को स्वर्ण-रजत के बेशकीमती हिंडोले में झूलते हुए देखा तो उनके आनंद का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर परिसर की भव्य सजावट के साथ ठाकुरजी की हरे रंग की पोशाक और स्वर्ण-रजत के आकर्षक श्रृंगार का मनमोहक सौंदर्य भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा। इसके चलते पूरा मंदिर परिसर बांकेबिहारी लाल के जयकारों से गूंजायमान हो उठा। वहीं, कुछ श्रद्धालु महिलाओं ने मल्हार गाकर अपनी खुशी व्यक्त की।