मीरजापुर में SIR के विरोध में भाकियू का प्रदर्शन, CEC को हटाने और विंध्य एक्सप्रेसवे रद्द करने की मांग
बैठक में संगठन विस्तार और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई, जिसमें कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
मीरजापुर में 23 अक्टूबर 2026 को भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने एसआईआर के विरोध में चुनार तहसील पर धरना दिया।
मीरजापुर में भारतीय किसान यूनियन ने राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर 23 अक्टूबर 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी के नेतृत्व में चुनार तहसील मुख्यालय पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा गया। किसान नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ मुकदमा चलाने, मतदाता सूची से हटाए गए 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान का अधिकार बहाल करने और चुनावी सुधार लागू करने की मांग उठाई। इसके साथ ही मीरजापुर जिले की स्थानीय समस्याओं को उठाते हुए प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे को निरस्त करने और अहरौरा में अस्थायी टोल प्लाजा हटाने की मांग भी की गई।
संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर देशभर में SIR के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन की मीरजापुर इकाई ने चुनार तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत में लोकतंत्र और सभी नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए किसान एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को तत्काल रद्द करने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की। साथ ही, बिना पारदर्शिता के मतदाता सूची से हटाए गए 13.41 करोड़ नागरिकों के मतदान के अधिकार बहाल करने और 2023 के अधिनियम में संशोधन करने की मांग उठाई। किसान नेताओं ने चयन पैनल में कैबिनेट मंत्री के स्थान पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की भी मांग की।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी ने कहा कि किसान व्यापक चुनावी सुधार चाहते हैं। उनकी मांग है कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation) लागू किया जाए, चुनाव में धनबल और बाहुबल पर रोक लगे तथा चुनावों के लिए राज्य द्वारा वित्तपोषण (State Funding) को कानूनी रूप दिया जाए।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपनी संवैधानिक शपथ का उल्लंघन किया है, इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का आरोप भी लगाया। वक्ताओं का दावा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता में बनाए रखने में मदद करने के उद्देश्य से वास्तविक नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाने जैसा गंभीर अपराध किया है। उन्होंने कहा कि नियमों में औपचारिक बदलाव करने का अधिकार केवल संसद के पास है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि जब तक संसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया नहीं चलाती, तब तक प्रधानमंत्री अपनी कैबिनेट के सामने खड़े इस गंभीर संवैधानिक संकट से बाहर नहीं निकल सकते।
किसान नेताओं ने SIR के मुद्दे पर विरोध कर रहे लोगों, विशेषकर छात्रों और युवाओं, के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने बताया कि 23 अक्टूबर 2026 को देशभर के जिला और तहसील मुख्यालयों, राज्य की राजधानियों तथा राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इन प्रदर्शनों का उद्देश्य दिल्ली पुलिस और RSS-BJP से जुड़े आपराधिक तत्वों द्वारा नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, जिनमें युवा महिला छात्राएं भी शामिल हैं, के साथ किए गए कथित क्रूर दमन और अत्याचार का विरोध करना है।
प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे पर किसान नेताओं ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस और RSS-BJP से जुड़े आपराधिक तत्वों द्वारा महिला छात्रों और पत्रकारों के यौन उत्पीड़न की घटनाएं पूरे देश के लिए चौंकाने वाली और शर्मनाक हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मोदी सरकार प्रदर्शनकारियों पर हमले जारी रखती है, तो किसानों को उनकी सुरक्षा के लिए आगे आना पड़ेगा। नेताओं ने राष्ट्रपति से मांग की कि इन मामलों की तत्काल जांच शुरू कराई जाए, दोषियों को गिरफ्तार किया जाए और वर्दीधारी कर्मियों तथा असामाजिक तत्वों में शामिल कथित अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला संविधान तथा कानून के शासन के खिलाफ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट सहित न्यायपालिका की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रहे व्यापक अपराधों पर स्वतः संज्ञान नहीं लिया गया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भारत में कोई कानून या नियम पुलिस को नागरिकों को उनके घरों में नजरबंद करने की अनुमति नहीं देता, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर सरकार पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, विशेषकर उन राज्यों में जहां डबल इंजन सरकारें हैं, पुलिस निजी घरों में प्रवेश कर राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर अवैध रूप से नजरबंद कर रही है, ताकि उन्हें शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने के अधिकार से वंचित किया जा सके। किसान नेताओं ने इसे संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए सरकार पर भारत को पुलिस स्टेट बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कथित राज्य प्रायोजित आतंक का विरोध करते हुए नागरिकों की निजता और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने मीरजापुर जिले की स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे जनहित में नहीं है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा, अहरौरा में बनाए गए अस्थायी टोल प्लाजा को तत्काल हटाने की मांग की गई। नेताओं का कहना था कि यह टोल प्लाजा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में भी शामिल नहीं है और इसका लीकेज भी बंद हो चुका है।
चुनार क्षेत्र के ढाब इलाके में गंगा किनारे बसे गांवों में बाढ़ और कटान की समस्या का मुद्दा भी उठाया गया। किसान नेताओं ने शिवपुर, चित्रहा, जलालपुर माफी, बगही और अन्य गांवों को बाढ़ से होने वाले कटान से बचाने के लिए उचित प्रबंध करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में किसान नेताओं ने तहसील प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और बिना किसी देरी के उचित कदम उठाए जाएंगे। धरना-प्रदर्शन में प्रदेश महासचिव प्रहलाद सिंह, मंडल अध्यक्ष अनिल सिंह, जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी, जिला महासचिव वीरेंद्र सिंह, मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सिंह, मंडल उपाध्यक्ष परशुराम मौर्य, जिला कोषाध्यक्ष स्वामी दयाल सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, राम महाल सिंह, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सावित्री देवी, मुन्नू प्रसाद गुप्ता, जमुना प्रसाद सिंह, बबलू, संतोष कुमार सिंह, रामशरण सिंह, श्याम केर पाल, चूल्हन बिंद, राम राज, नंदलाल भारती, मुलायम यादव, हृदय शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।