उदयपुर के निम्बार्क महाविद्यालय प्रांगण में आयोजित रामलीला के पांचवें दिन श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के स्वरूपों का पूजन करते अतिथि एवं श्रद्धालु।

उदयपुर में श्री राम लीला समिति के तत्वावधान में निम्बार्क महाविद्यालय प्रांगण में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला के पांचवें दिन राम विवाह से लेकर राम वन गमन तक के प्रसंगों का मंचन किया गया। राम बारात के उल्लास और विवाह के मंगलमय वातावरण के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्षों के वनवास की विदाई ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। एक ही शाम में विवाह की खुशियों और वन गमन की करुणा ने पूरे रामलीला प्रांगण को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत शाम छह बजे शहर के प्रसिद्ध अस्थल मंदिर से भगवान श्रीराम की भव्य बारात के साथ हुई। ‘राम-लखन-जानकी, जय बोलो हनुमान की’ के जयकारों से मार्ग गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों और राजस्थान के पारंपरिक थाली-मांदळ की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते सूरजपोल होते हुए निम्बार्क महाविद्यालय स्थित रामलीला प्रांगण पहुंचे। यहां घराती बने स्थानीय श्रद्धालुओं ने बारातियों का आत्मीय स्वागत किया।

रामलीला प्रांगण में दूल्हे के स्वरूप में भगवान श्रीराम का पारंपरिक लोकाचार के अनुसार पूजन किया गया। मंच पर श्रीराम-जानकी विवाह का प्रसंग प्रस्तुत होते ही श्रद्धालु भक्तिभाव में डूब गए। कन्यादान के समय श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार कन्यादान अर्पित किया।

विवाह के मंगलमय प्रसंग के तुरंत बाद मंच पर माता कैकयी के वरदान, महाराज दशरथ की विवश प्रतिज्ञा और भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वन गमन का मंचन शुरू हुआ। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण राजसी वस्त्र त्यागकर वल्कल धारण कर अवधपुरी से विदा होने लगे तो महाराज दशरथ के विलाप और अयोध्यावासियों के आर्तनाद ने वातावरण को करुणामय बना दिया। कुछ ही देर पहले विवाह का उत्सव मना रहे श्रद्धालु वन गमन के प्रसंग में भावुक हो उठे और अनेक लोगों की आंखों से आंसू बह निकले।

वृंदावन के पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान के वेदप्रकाश भारद्वाज और घनश्याम शर्मा के सान्निध्य में 40 कलाकारों ने प्रसंगों का मंचन किया। कलाकारों के अभिनय के माध्यम से भक्ति, करुणा, वियोग और वैराग्य के भाव प्रस्तुत किए गए।

राम बारात में भक्ति के साथ दिखा सोशल मीडिया का उत्साह

अस्थल मंदिर से निम्बार्क महाविद्यालय तक निकली राम बारात में युवाओं का उत्साह भी देखने को मिला। रथ पर विराजमान राम, लक्ष्मण और जानकी के स्वरूपों को देखकर सड़क के दोनों ओर खड़े युवा अपने स्मार्टफोन के कैमरों से तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए। कुछ युवाओं ने रील बनाई तो कुछ ने ‘हम भी प्रभु श्रीराम के बाराती’ जैसे कैप्शन के साथ इंस्टाग्राम पर स्टोरी साझा की। इस दौरान सेल्फी लेने की होड़ भी दिखाई दी।

रामलीला समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय बाद पहली बार आयोजित दस दिवसीय रामलीला शहरवासियों को आनंदित करने के साथ प्रभु श्रीराम की भक्ति से भी जोड़ रही है। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रतिदिन बैठक व्यवस्था बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि रामलीला देखने के लिए न कोई शुल्क है और न ही प्रवेश पत्र की आवश्यकता है। उन्होंने सभी रामभक्तों से रामलीला में शामिल होने का अनुरोध किया।

समिति के महासचिव भंवरलाल शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में बड़ीसादड़ी गोपाल सत्संग आश्रम के स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज, कर्नल अनुराग मोहन भट्ट, राज्यपाल के सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी, राजस्थान विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत, एमपीयूएटी के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा, महेश सेवा समिति के अध्यक्ष देवेंद्र मालीवाल, जिला कोषाधिकारी दिग्विजयसिंह झाला, प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना, पूर्व राज्य मंत्री जगदीशराज श्रीमाली, पूर्व नेता प्रतिपक्ष दिनेश श्रीमाली, विहिप चित्तौड़ प्रांत के धर्माचार्य सम्पर्क प्रमुख बसंत चौबीसा, फतहनगर से कैलाश अग्रवाल (अनमोल) और कैलाश खंडेलवाल का सम्मान किया गया।

अतिथियों का सम्मान समिति के विप्र फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल, समन्वयक अशोक बाबेल, हरीश मारवाड़ा, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, चेतन माली, चैनशंकर दशोरा, धरणीधर तिवारी, जगन्नाथ शर्मा, दुर्गेश सुखवाल, गजेंद्र चौबीसा, निर्मल चौबीसा, दीपक डांगी, अरुण त्रिवेदी, एडवोकेट दिनेश गुप्ता, राकेश पालीवाल सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने किया।

इस अवसर पर स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज ने कहा, “राम केवल मानव, युवराज, राजा मात्र नहीं, साक्षात धर्म हैं, आदर्श आचरण हैं।”

संयोजक डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी ने बताया कि बुधवार, 14 अक्टूबर को रामलीला में श्रीराम-केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत मिलन के प्रसंगों का मंचन होगा। 15 अक्टूबर को श्रीरामजी का ऋषियों से मिलन, गिद्धराज जटायु, शूर्पणखा नासिका भंग, खर-दूषण वध और सीता हरण के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। दस दिवसीय रामलीला में आगामी दिनों के ये प्रसंग भी श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण रहेंगे।

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