खेरोदा चातुर्मास में कोमल मुनि महाराज का संदेश, सच्चा गुरु ही मोक्ष मार्ग का सच्चा मित्र
खेरोदा के जैन स्थानक भवन में चातुर्मास प्रवचन के दौरान मेवाड़ उप प्रवर्तक कोमल मुनि महाराज ने गुरु, सच्ची मित्रता और मोक्ष मार्ग का महत्व बताया।
तस्वीर में जैन स्थानक भवन, खेरोदा में आयोजित प्रवचन सभा के दौरान बाएं ओर मेवाड़ उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि महाराज साहब और दाएं ओर हर्षित मुनि बैठे हुए नजर आ रहे हैं।
खेरोदा कस्बे में चल रहे चातुर्मास के दौरान रविवार को जैन स्थानक भवन में आयोजित प्रवचन सभा में मेवाड़ उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि महाराज साहब ने सच्चे मित्र और गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन के इस सफर में मनुष्य अनेक रिश्ते बनाता है, लेकिन सच्चा मित्र वही होता है जो सही राह दिखाए। उन्होंने कहा कि इस संसार में सबसे सच्ची मित्रता वही है जो मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष मार्ग की ओर ले जाए। उन्होंने कहा कि गुरु से बढ़कर इस दुनिया में कोई सच्चा मित्र नहीं हो सकता, क्योंकि गुरु निस्वार्थ भाव से सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
गुरुदेव कोमल मुनि महाराज साहब ने मित्रता की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता दो हृदयों को एक कर देती है और दुखों को सुख में बदलने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र वह होता है जो बिना कहे मन की बात समझ ले, उदार और परोपकारी हो तथा सुख के समय पीछे रहकर भी दुख की घड़ी में सबसे आगे खड़ा हो जाए। उन्होंने बल देकर कहा कि सच्चा मित्र वही है जो मनुष्य को पाप कार्यों से बचाकर धर्म के मार्ग पर लगाए तथा भय और शोक से बाहर निकालकर जीवन को सुगम बनाए।
धर्म के वास्तविक मर्म को स्पष्ट करते हुए मेवाड़ उप प्रवर्तक गुरुदेव कोमल मुनि महाराज साहब ने कहा कि धर्म केवल भोग और उपभोग में नहीं है, बल्कि धर्म में त्याग, तप, नियम, व्रत तथा सम्यक् ज्ञान और दर्शन की प्रधानता है।
प्रवचन कार्यक्रम के दौरान अध्ययनशील एवं सेवाभावी हर्षित मुनि ने 'श्री सुख विपाक' का सारगर्भित वांचन कराया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया गया कि वे गुरुदेव को अपना सच्चा मित्र मानकर उनके बताए मोक्ष मार्ग पर चलें और अपने जीवन को पावन बनाएं।