तस्वीर में सुन्दरा के प्रभु भाई स्मारक में लोग हाथ में पुस्तिकाएं थामे खड़े हैं।

खेरवाड़ा में सुन्दरा फले के गमेती रमण खराड़ी की अध्यक्षता में प्रभु भाई स्मारक सुन्दरा में खदान मजदूर आंदोलन से जुड़े लक्ष्मण मीणा का शहादत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर जागरूक युवा एवं विद्यार्थी संगठन के पूर्व अध्यक्ष प्रभु लाल की जीवनी पर आधारित पुस्तिका ‘ऐसे थे हमारे प्रभु भाई’ का विमोचन किया गया।

सभा में जनवादी मजदूर यूनियन के संरक्षक डीएस पालीवाल ने बताया कि वर्ष 2002 में मसारों की ओबरी और आसपास की खदानों में कार्यरत मजदूरों ने न्यूनतम मजदूरी, पीएफ-ईएसआई सुविधा और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन के समर्थन में किसान, युवा, विद्यार्थी और आम जनता भी जुड़ गई।

जनवादी मजदूर यूनियन के सचिव जयंतीलाल ने विभिन्न जन आंदोलनों के उदाहरण देते हुए कहा कि सत्ता और चेहरे बदलते रहे, लेकिन मजदूरों, किसानों, युवाओं और विद्यार्थियों की समस्याओं में अपेक्षित बदलाव नहीं आया। उन्होंने हक की लड़ाई लड़ने वालों के दमन का मुद्दा भी उठाया।

जागरूक युवा एवं विद्यार्थी संगठन के सलाहकार विजय परमार ने कहा कि लक्ष्मण, रामलाल और प्रभु भाई के कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। प्रभु भाई के अभिन्न साथी मोहन डामोर ने उनके परिवार के संगठन के प्रति समर्पण और आंदोलनों में योगदान पर प्रकाश डाला।

मजदूर किसान हक संगठन के सचिव शांतिलाल डामोर ने मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता के एकजुट संघर्ष को जरूरी बताया। सभा में प्रवीण अहारी, कन्हैयालाल और इलियास मकरानी ने भी विचार रखे। संचालन संयोजक लोकेश भील ने किया। इस अवसर पर पुस्तिका का विमोचन किया गया।

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