खेरवाड़ा क्षेत्र में आशा सहयोगिनियों को आईसीडीएस अधिकारी बनकर फोन कर साइबर ठगी करने का मामला सामने आया है। अज्ञात व्यक्ति ने दो आशा सहयोगिनियों को मोबाइल पर फोन किया और बातचीत के दौरान विभाग से जुड़ी वास्तविक एवं गोपनीय जानकारी साझा कर उनका विश्वास हासिल किया। इसके बाद दोनों महिलाओं के बैंक खातों से कुल 53 हजार रुपये निकाल लिए गए।

मिली जानकारी के अनुसार, एक आशा सहयोगिनी के बैंक खाते से महज पांच मिनट के अंतराल में तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 43 हजार रुपये की ठगी की गई। वहीं दूसरी आशा सहयोगिनी के खाते से भी 10 हजार रुपये की राशि निकाल ली गई। इस तरह दोनों मामलों में कुल 53 हजार रुपये की साइबर ठगी सामने आई है।

ठगी का पता चलने के बाद दोनों आशा सहयोगिनियों ने ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण मीना से संपर्क किया। डॉ. मीना ने तत्काल आशा सहयोगिनियों के ग्रुप में इस प्रकार की साइबर ठगी को लेकर सूचना साझा कर सभी को सतर्क किया। उन्होंने अनजान फोन कॉल पर किसी भी प्रकार की बैंकिंग अथवा विभागीय जानकारी साझा नहीं करने की अपील की।

मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय थाना अधिकारी मन मंथ आढ़ा से संपर्क किया गया। उन्होंने तत्काल साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी। इसके बाद डॉ. मीना के माध्यम से दोनों पीड़ित आशा सहयोगिनियों ने 1930 पर कॉल कर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई।

एक पीड़िता के खाते से पांच मिनट के अंतराल में तीन ट्रांजैक्शन के जरिए क्रमशः 17,055 रुपये, 4,235 रुपये एवं 21,873 रुपये की ठगी की गई। ठग द्वारा विभाग से संबंधित वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराने को लेकर आशंका जताई जा रही है कि साइबर ठगों के पास आईसीडीएस विभाग से जुड़ा कोई डाटा पहुंचा हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

समय रहते मामले की जानकारी सामने आने और आशा सहयोगिनियों को सचेत किए जाने से अन्य महिलाएं संभावित साइबर ठगी का शिकार होने से बच गईं। अधिकारियों ने सभी आशा सहयोगिनियों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर ओटीपी, बैंक खाता, एटीएम, यूपीआई, पासवर्ड अथवा अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करें और संदिग्ध लेन-देन होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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