हर्षित मुनि के सान्निध्य में सुखविपाक सूत्र का वांचन, दुर्लभ मानव जीवन को सार्थक बनाने का दिया संदेश

खेरोदा में आयोजित पावन धर्मसभा में हर्षित मुनि जी ने 'सुखविपाक' सूत्र का प्रभावी वांचन करते हुए दुर्लभ मनुष्य जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विचार, वचन और कर्म में एकरूपता अपनाने का संदेश दिया, वहीं श्रद्धालुओं ने जीवन को सार्थक बनाने का संकल्प भी लिया।

Update: 2026-08-03 14:44 GMT

खेरोदा में आयोजित पावन धर्मसभा के दौरान हॉल के फर्श पर बैठकर धार्मिक प्रवचन सुनते जैन श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं।

खेरोदा। धर्म नगरी में आयोजित पावन धर्मसभा में गुरुदेव कोमल मुनि के प्रेरणादायी वचनों को आत्मसात करते हुए हर्षित मुनि जी ने 'सुखविपाक' सूत्र का प्रभावी वांचन किया। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को दुर्लभ मनुष्य जीवन के महत्व का बोध कराते हुए इसे महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए सार्थक बनाने का आह्वान किया।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने फरमाया कि मनुष्य जीवन अत्यंत अनमोल और दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि यह जीवन केवल आयु कम होने, दिन बीतने या काल-चक्र के पहिए में पिसकर समाप्त होने के लिए नहीं मिला है, बल्कि प्रभु ने हमें यह जीवन किसी महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि इस अमूल्य जीवन को राग, द्वेष, शोक और संताप में व्यर्थ गंवाने के बजाय महापुरुषों के चरित्र से प्रेरणा लेकर सार्थक बनाना चाहिए।

मुनि श्री ने जीवन जीने की कला पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खोखलेपन या दोहरेपन में कोई महानता नहीं होती। वास्तविक महानता तब प्रकट होती है, जब व्यक्ति के विचार, वचन और कर्म में एकरूपता हो तथा वह अंदर और बाहर से एक समान हो।

उन्होंने आगे कहा कि अमर कहानी उन्हीं लोगों की बनती है, जिनका मन निर्मल, निष्कपटी और दोष-रहित होता है, जबकि कलुषित और विकारों से भरा मन इतिहास में अमर नहीं हो पाता।

धर्मसभा के अंत में उपस्थित जनों ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन से दोहरापन समाप्त कर जीवंतता लाएंगे तथा अपने पीछे ऐसा प्रेरणादायी इतिहास छोड़ेंगे, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव सही राह दिखाता रहे।

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