कीर्तन पूर्बिया ने बनाए प्रकृति अनुकूल गणपति, 5 साल से मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर कर रहे पूजा
झाड़ोल के कक्षा 9 के छात्र कीर्तन पूर्बिया 5 साल से मिट्टी के गणपति बनाकर पूजा करते हैं और नदी में प्रकृति अनुकूल विसर्जन करते हैं।
तस्वीर में झाड़ोल में मिट्टी के गणपति की प्रतिमा हाथ में लिए खड़े छात्र कीर्तन पूर्बिया नजर आ रहे हैं।
झाड़ोल में कक्षा 9 के छात्र कीर्तन पूर्बिया निवासी ओडा ने स्वप्रेरणा से मिट्टी के गणपति बनाकर पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव की मिसाल पेश की। कीर्तन पिछले 5 वर्षों से मिट्टी के गणपति बनाकर उन्हें घर में स्थापित करता आ रहा है। इस वर्ष भी उसने मिट्टी से गणपति की प्रतिमा तैयार कर दस दिन तक विधिवत पूजा-अर्चना की और अंतिम दिन गणपति का नदी में विसर्जन किया।
कीर्तन ने गणपति प्रतिमा को घर में स्थापित करने के बाद दस दिनों तक पूर्ण मनोयोग से दोनों समय आरती की। इस दौरान भगवान गणपति को तरह-तरह की मिठाइयों का प्रसाद चढ़ाया गया। घर में गणपति की स्थापना और दोनों समय पूजा-अर्चना से पूरे परिवार में आनंद का माहौल बना रहा। अंतिम दिन विसर्जन से पहले आरती की गई, जिसके बाद केले और लड्डू का प्रसाद वितरित किया गया।
कीर्तन की इस रुचि को देखते हुए उसके परिवार वाले भी उसे पूरी तरह सहयोग करते हैं। मिट्टी के गणपति बनाने का फायदा यह है कि विसर्जन के बाद गणपति की प्रतिमा बिना प्रदूषण के नदी में मिट्टी के रूप में विलीन हो जाती है, जो प्रकृति अनुकूल है।
कीर्तन राजस्थान पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल झाड़ोल में अध्ययन करता है। उसे विभिन्न तरह की पेंटिंग और चित्रकारी में भी रुचि है। वह चेहरा देखकर भी समान चित्रकारी बना देता है। पिछले पांच वर्षों से मिट्टी के गणपति बनाकर पूजा और विसर्जन की परंपरा को जारी रखकर कीर्तन ने अपनी कला रुचि के साथ प्रकृति अनुकूल गणेश प्रतिमा के प्रति अपनी पहल को भी बनाए रखा है।