तस्वीर में झाड़ोल के विद्यानिकेतन में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान हाथों में प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह थामे सम्मानित होने वाले छात्र-छात्राएं और अतिथि नजर आ रहे हैं।

हनुमान भक्त मंडल झाड़ोल एवं भारतीय संस्कृति अभ्युत्थान न्यास, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में समरसता गतिविधि के अंतर्गत संत शिरोमणि गुरु रविदासजी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर झाड़ोल ब्लॉक की श्रेष्ठ प्रतिभाओं का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। स्थानीय विद्यानिकेतन झाड़ोल में हुए समारोह में झाड़ोल ब्लॉक के सभी राजकीय विद्यालयों में बोर्ड कक्षाओं तथा विभिन्न संकायों में विद्यालय स्तर पर श्रेष्ठ परिणाम देने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया।

समारोह की अध्यक्षता विभाग संघ चालक हेमेंद्र कुमार श्रीमाली ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मोरध्वज व्यास, मुख्य वक्ता विभाग सेवा प्रमुख प्रोफेसर किशोरी लाल, विशिष्ट अतिथि खंड संघ चालक वीरेंद्र कोड़ियां, प्रधानाचार्य सैलाना दिनेश जैन, बीसीएमओ फलासिया डॉ. मुकेश गरासिया, मुख्य चिकित्सक झाड़ोल डॉ. रोशन दरांगी एवं विभाग घुमंतू कार्य प्रमुख पंकज पालीवाल उपस्थित रहे। प्राचार्य लाल सिंह शक्तावत ने अतिथियों का स्वागत किया।

हेमेंद्र कुमार श्रीमाली ने स्वामी विवेकानंद के आदर्श जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से छात्रों में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने की सीख दी। मुख्य वक्ता प्रोफेसर किशोरी लाल, विभाग सेवा प्रमुख ने छात्रों को संस्कार एवं संस्कृति की भावना से प्रेरित किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति के इतिहास के संरक्षण तथा वेदों की अवधारणा को नैतिक आचरण में सम्मिलित करते हुए सदाचार एवं अनुशासन का पालन करने की सीख दी।

मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मोरध्वज व्यास ने छात्रों को विद्यार्जन के साथ संस्कारवान बनने और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ निश्चय रखने की शिक्षा दी। कार्यक्रम का पूर्ण विवरण एवं उद्देश्य विभाग समरसता संयोजक पदम प्रकाश जैन ने प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर विद्यानिकेतन के छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में मनीष पुरोहित, मनीष जोशी, सुधीर जोशी, शेरसिंह राणावत, कैलाश जैन, प्रतापसिंह, गजेंद्र पारगी, सोहन पटेल, चिन्मय जैन, मोहन सिंह, राम सिंह, रौनक लक्ष्कार, अरविंद सिंह आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन नंद लाल लक्ष्कार ने किया। समारोह में झाड़ोल ब्लॉक के राजकीय विद्यालयों के श्रेष्ठ परिणाम देने वाले छात्रों का सम्मान करने के साथ उन्हें शिक्षा, संस्कार, संस्कृति, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के मूल्यों के प्रति प्रेरित किया गया।

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