जवास के प्राचीन आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में 30 अगस्त को होगा रक्षक देवी-देवता स्थापना एवं भूमि शिलान्यास महामहोत्सव
खेरवाड़ा के जवास स्थित प्राचीन श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में 30 अगस्त को रक्षक देवी-देवता स्थापना एवं भूमि शिलान्यास महामहोत्सव होगा। आयोजन की तैयारियां श्रद्धालुओं और समिति की ओर से की जा रही हैं।
तस्वीर में जवास के अतिप्राचीन आदिनाथ जैन मंदिर में सफेद संगमरमर की भगवान आदिनाथ की प्रतिमा और मंदिर का गर्भगृह नजर आ रहा है।
खेरवाड़ा तहसील क्षेत्र के जवास स्थित अतिप्राचीन एवं चमत्कारिक श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में 30 अगस्त 2026, रविवार को रक्षक देवी-देवता स्थापना एवं भूमि शिलान्यास महामहोत्सव आयोजित किया जाएगा। ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व से जुड़े इस आयोजन को लेकर मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और आयोजन समिति की ओर से तैयारियां की जा रही हैं।
जवास का आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर करीब 11वीं-12वीं सदी का प्राचीन मंदिर बताया जाता है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार पूर्व में जवास में करीब 1300 जैन परिवारों की आबादी रहती थी। मंदिर की प्राचीन प्रतिमा जी चेल्यामान होकर हवा में विचरण करती थी, ऐसी मान्यता भी इससे जुड़ी हुई है। भट्टारक जी के शाप के कारण करीब 84 वर्षों तक यहां कोई जैन परिवार नहीं रहा। मंदिर का स्थापित समय वर्ष 2024 में समाप्त हुआ और इसके बाद मंदिर अपने दिव्य इतिहास, आस्था एवं महिमा के कारण पुनः चर्चा में आया है।
मंदिर के जीर्णोद्धार एवं विकास कार्यों के तहत पिछले वर्षों में विभिन्न कार्य किए गए हैं। वर्ष 2019 में मंदिर के जीर्णोद्धार की नींव रखी गई। इसके बाद मंदिर की रंगाई-पुताई, मूल स्वरूप में लाने, छत पर वायनिंग, लाइट एवं नल-रंग-रोगन, मूल शिखर एवं गर्भगृह के कार्य सहित अन्य आवश्यक कार्य किए गए। वर्ष 2025 में जिनेन्द्र आराधना, ध्वजारोहण एवं नवनिर्माण महामहोत्सव का ऐतिहासिक आयोजन भी हुआ।
अब आगामी आयोजन में रक्षक देवी-देवता स्थापना एवं भूमि शिलान्यास किया जाएगा। वर्ष 2026 की भविष्य की योजना के तहत मंदिर क्षेत्र का सतत विकास एवं संरक्षण, मंदिर के समीप भूमि क्रय कर उसके शिलान्यास सहित विभिन्न कार्य प्रस्तावित हैं।
महामहोत्सव को आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी गुरुदेव, उपाध्याय श्री 108 शुभम सागर जी, मुनि श्री 108 सक्षम सागर जी, मुनि श्री 108 शैलेन्द्र जी गुरुदेव तथा आर्यिका गणिनी प्रमुख श्री 105 ज्ञानमती माताजी का पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त है।
आयोजक आदिनाथ ट्रस्ट मंडल एवं अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा परिषद, ऋषभदेव ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक आयोजन में सहभागिता करने का आह्वान किया है। समिति के अनुसार जवास मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, इतिहास और पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक धरोहर स्थल है। मंदिर को “सौभाग्यधाम” के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से श्रद्धालुओं के सहयोग एवं सहभागिता की अपेक्षा की गई है।