खेरवाड़ा तहसील के बरोठी ब्राह्मण गांव के चौराहे पर पारंपरिक आदिवासी लोकनाट्य गवरी का भव्य मंचन किया गया। गवरी कला दल के कलाकारों ने विभिन्न पौराणिक एवं लोक कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। कलाकारों के अभिनय, नृत्य, संगीत और संवाद अदायगी ने कार्यक्रम में देर तक लोगों की रुचि बनाए रखी।

गवरी राजस्थान की आदिवासी लोक संस्कृति और परंपरा से जुड़ा विशिष्ट लोकनाट्य है। इसमें नृत्य, अभिनय, संगीत और संवाद के माध्यम से लोकजीवन, धार्मिक आस्था तथा सामाजिक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और साज-सज्जा के साथ विभिन्न पात्रों का अभिनय करते हुए गवरी की जीवंत परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। ढोल, थाली व अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ताल पर कलाकारों के नृत्य ने कार्यक्रम स्थल के वातावरण को उत्साह और उल्लास से भर दिया।

ग्रामवासी अशोक व्यास एवं बसंत व्यास ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने हास्य, वीरता, भक्ति और सामाजिक संदेश से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों के अभिनय, नृत्य और संवाद अदायगी पर दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। गवरी देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे, जिससे चौराहे पर देर तक ग्रामीणों की भीड़ बनी रही।

कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे और कलाकारों का मनोबल बढ़ाया। ग्रामीणों ने गवरी जैसी पारंपरिक लोक कला के संरक्षण और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई। बरोठी ब्राह्मण में आयोजित यह मंचन लोक संस्कृति और परंपरागत कला के प्रति ग्रामीणों की भागीदारी को भी सामने लाता है।


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