प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे से पहले रणदीप सुरजेवाला को राज्य का प्रभारी बनाए जाने के संदर्भ में दोनों नेताओं की तस्वीरें नजर आ रही हैं।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे से ठीक पहले पार्टी में बड़ा बदलाव किया है। कांग्रेस ने महासचिव रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का नया प्रभारी नियुक्त किया है। अब गुजरात के साथ कर्नाटक की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी। इससे पहले गुजरात के प्रभारी मुकुल वासनिक थे। कांग्रेस ने उन्हें इस जिम्मेदारी से हटा दिया है।

कांग्रेस का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 सितंबर को गुजरात के वडोदरा दौरे पर जाने वाले हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी SRCC में कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री वडोदरा में आयोजित ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। वडोदरा वही शहर है, जहां से नरेंद्र मोदी ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। उनके दौरे को लेकर यहां विशेष तैयारियां की जा रही हैं और ‘स्वच्छता से स्वागत’ की तैयारी भी की जा रही है।

ऐसे समय में कांग्रेस द्वारा रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी बनाना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। गुजरात में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी के सामने अभी से संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारी तेज करने की चुनौती है। गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा हैं।

रणदीप सुरजेवाला को गुजरात की जिम्मेदारी देने के पीछे उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठन संभालने के अनुभव को अहम माना जा रहा है। वह पहले से कर्नाटक के प्रभारी हैं। कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और पार्टी के अंदर गुटबाजी जैसे मुद्दों के बीच उन्होंने संगठन को संभालने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि इसी अनुभव के कारण केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है।

गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है। लंबे समय से यहां बीजेपी का मजबूत राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में कांग्रेस के सामने पार्टी संगठन को मजबूत करने और बीजेपी को चुनौती देने की बड़ी जिम्मेदारी है। सुरजेवाला को गुजरात की कमान देकर कांग्रेस ने यह संकेत दिया है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में कमजोर तैयारी के साथ मैदान में उतरना नहीं चाहती।

गुजरात का प्रभारी बनाए जाने के बाद रणदीप सुरजेवाला ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें गुजरात और कर्नाटक के प्रभारी महासचिव की जिम्मेदारी देने के लिए वह पार्टी नेतृत्व के आभारी हैं।

सुरजेवाला ने गुजरात के इतिहास और कांग्रेस की विचारधारा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बापू और सरदार पटेल की कर्मभूमि गुजरात की नसों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सोच और विचारधारा हमेशा से रही है। उन्होंने सत्य, अहिंसा और सद्भाव की बात करते हुए कहा कि इन मूल्यों ने दशकों से देश और दुनिया को एक नया रास्ता दिखाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं के सहयोग से गुजरात में उज्ज्वल भविष्य के लिए नई राजनीति और सामाजिक जुड़ाव का रास्ता तैयार किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में कांग्रेस का परचम फिर लहराएगा।

दरअसल, गुजरात में कांग्रेस लंबे समय से संगठन से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। मुकुल वासनिक के प्रभारी रहते पार्टी के अंदर की गुटबाजी को पूरी तरह रोकने में सफलता नहीं मिली। कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के लिए ‘संगठन सृजन अभियान’ भी चलाया, लेकिन इसका असर अपेक्षा के मुताबिक दिखाई नहीं दिया।

दूसरी ओर, बीजेपी ने गुजरात में अपनी रणनीति के तहत ‘एच फैक्टर’ पर दांव लगाया है। इसमें हर्ष संघवी और हेमांग जोशी जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण भूमिका में देखा जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस को एक ऐसे प्रभारी की जरूरत थी, जो संगठन को संभालने के साथ-साथ बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक मुकाबले को भी मजबूती से आगे बढ़ा सके। रणदीप सुरजेवाला की नियुक्ति को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

सुरजेवाला की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत रही है। उन्होंने बहुत कम उम्र में राजनीति में कदम रखा था। 17 वर्ष की उम्र में वह हरियाणा प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव बने थे। वह छात्र राजनीति से भी जुड़े रहे हैं। साल 1992 में वह पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के सबसे युवा सीनेटर बने और सिंडीकेट के सदस्य भी रहे।

मार्च 2000 में रणदीप सुरजेवाला भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। इस पद पर वह लंबे समय तक रहने वाले नेताओं में शामिल रहे। उनके पिता चौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला जाने-माने वकील और वरिष्ठ राजनेता थे। राजनीतिक परिवार से आने के कारण सुरजेवाला को शुरुआत से ही राजनीति का अनुभव और मार्गदर्शन मिला।

रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस के प्रभावी और आक्रामक प्रवक्ताओं में भी गिने जाते हैं। वह अपने तर्कों और आक्रामक अंदाज में विपक्ष को घेरने के लिए जाने जाते हैं। अब गुजरात में उनकी यही राजनीतिक शैली कांग्रेस के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

सुरजेवाला की नियुक्ति के बाद गुजरात में युवाओं और Gen Z से जुड़े मुद्दों पर भी कांग्रेस के ज्यादा मुखर होने की संभावना है। पार्टी युवा नेताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ा सकती है। हाल के दिनों में कांग्रेस ने गुजरात यूनिवर्सिटी में पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता के कार्यकाल से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों को उठाया था। इससे बीजेपी और ABVP पर भी दबाव बनाने की कोशिश की गई।

वडोदरा की पारुल यूनिवर्सिटी में भी कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने मुद्दे उठाए थे। गुजरात के ज्यादातर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव 1993 से पूरी तरह बंद हैं। इसके बाद 2023 में ‘गुजरात पब्लिक यूनिवर्सिटीज एक्ट’ भी पारित किया गया।

इस कानून के तहत महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी यानी MSU वडोदरा जैसी कुछ यूनिवर्सिटीज में, जहां किसी रूप में प्रत्यक्ष चुनाव होते थे, वहां भी छात्रसंघों और निर्वाचित संस्थाओं को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस छात्रों और युवाओं से जुड़े इन मुद्दों को और आक्रामक तरीके से उठा सकती है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे से ठीक पहले रणदीप सुरजेवाला को राज्य का प्रभारी बनाना कांग्रेस की आगामी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है। अब उनके सामने संगठन की गुटबाजी दूर करने, युवाओं से जुड़ने और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को मजबूत करने की बड़ी चुनौती होगी।