संकट में पिघला दिल: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह जल्द करेंगे भारत का दौरा, रिश्तों को मिलेगी नई दिशा|
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह बालेन जल्द ही भारत के आधिकारिक दौरे पर आ सकते हैं, जिससे दोनों देशों के संबंधों में नए बदलाव की उम्मीद है।
तस्वीर में बाईं ओर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दाईं ओर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) नजर आ रहे हैं|
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह बालेन जल्द ही भारत के दौरे पर नई दिल्ली आ सकते हैं। नेपाली राजनीतिक परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना जाता है, और बालेन शाह भी इस परंपरा को निभाते हुए अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के तहत भारत पहुंचेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स और विश्वस्त सूत्रों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में न्यूयॉर्क शामिल होने के बाद उनके सीधे या काठमांडू लौटने के बाद दशहरा से पहले भारत आने की पूरी उम्मीद है।
इस यात्रा को लेकर कूटनीतिक हलकों में खास चर्चा इसलिए भी है क्योंकि कुछ समय पहले तक दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों और कुछ बयानों को लेकर असहजता की स्थिति बन गई थी। नेपाल द्वारा लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे इलाकों को अपने आधिकारिक नक्शे में शामिल किए जाने के बाद भारत ने इस एकतरफा कार्रवाई को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया था। इसके अलावा बालेन शाह के शुरुआती बयानों से भी द्विपक्षीय संबंधों में अनिश्चितता का माहौल उत्पन्न हुआ था, जिससे यह कयास लगाए जा रहे थे कि शायद इस बार पारंपरिक द्विपक्षीय यात्रा की यह परिपाटी टूट सकती है।
हालांकि, इस बीच नेपाल में आई एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने दोनों देशों के रिश्तों की नई इबारत लिख दी है। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की वजह से भारी तबाही मची, जिसमें बड़े पैमाने पर जनहानि हुई और हजारों लोग लापता हो गए। इस संकट की घड़ी में भारत ने सबसे पहले आगे बढ़कर नेपाल का साथ निभाया और बिना किसी देरी के राहत सामग्री व बचाव दल भेजना शुरू किया। नई दिल्ली की ओर से संकटग्रस्त नेपाल को विशेष बचाव दल, मेडिकल सहायता, फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम और भारी मात्रा में राहत सामग्री पहुंचाई गई। भारत के इस त्वरित मानवीय सहयोग ने नेपाल के जनमानस में एक गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ी है, जिससे दोनों देशों के बीच उपजे तनाव के बादल छटने लगे हैं।
स्वयं नेपाली प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में अपने संबोधन के दौरान इस संकट में भारत द्वारा पहुंचाई गई समय पर मदद की खुले दिल से सराहना की और संसद के मंच से भारत का आभार व्यक्त किया। इसके अलावा नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने भी पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि प्रधानमंत्री बालेन शाह की पहली विदेश यात्रा के रूप में नई दिल्ली ही तय है और तारीखों को लेकर काम चल रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर बालेन शाह के संबोधन के दौरान नेपाल में आई आपदा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है। वह वैश्विक मंच से यह रख सकते हैं कि नेपाल की इस तबाही के पीछे जलवायु परिवर्तन का गंभीर असर है। इसके तुरंत बाद उनकी यह संभावित नई दिल्ली यात्रा दोनों पड़ोसी देशों के बीच पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को और अधिक मजबूत करने तथा आपसी सहयोग के नए द्वार खोलने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम साबित होगी। आपदा के इस दौर में भारत के सदाबहार मित्रवत रवैये ने अंततः दोनों देशों के बीच के गतिरोध को पिघला दिया है और कूटनीति के मोर्चे पर एक नई शुरुआत के संकेत दिए हैं।