कटिहार में बाढ़ का कहर, 7 गांव जलमग्न; पीड़ित बोले- न पानी, न रहने की व्यवस्था, प्रशासन ने दिया सामुदायिक रसोई का भरोसा|
गंगा और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर से कटिहार के बरारी और अमदाबाद प्रखंड के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस तस्वीर में बिहार के कटिहार जिले के बाढ़ प्रभावित गांव में घरों के अंदर भरा हुआ बाढ़ का पानी नजर आ रहा है।
कटिहार में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण बरारी और अमदाबाद प्रखंड के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुसने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लोगों के सामने खाने-पीने के साथ रहने की समस्या भी खड़ी हो गई है। प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं मिल रही है और रहने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। उनका आरोप है कि मुखिया, सरपंच और वार्ड सदस्य भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
अमदाबाद प्रखंड में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद दक्षिणी करीमुल्लापुर, भवानीपुर खट्टी, पार दियारा, दुर्गापुर, चौकियां पहाड़पुर और लखनपुर गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। वहीं बरारी प्रखंड के उचला गांव में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। इस तरह दोनों प्रखंडों के सात गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
बरारी प्रखंड के उचला गांव में रात के समय अचानक बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया। पानी बढ़ने के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हुआ। बरारी अंचल अधिकारी मनीष कुमार उचला गांव पहुंचे और बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली।
बाढ़ प्रभावित नरेश चौधरी और अंजली देवी ने बताया कि अचानक पानी घरों में घुसने से उनके सामने खाने-पीने की परेशानी खड़ी हो गई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अन्न तक नसीब नहीं हो रहा है। पीड़ितों ने सरकार से खाने की व्यवस्था करने की मांग की, ताकि उन्हें भूखे रहने की मजबूरी न हो।
गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद उचला गांव में मनरेगा के तहत सीजटोला में बनाया गया दो गांवों को जोड़ने वाला बांध भी टूट गया। बांध टूटने से दोनों गांवों के बीच संपर्क टूट गया है। अब लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
घरों में पानी घुसने के बाद कई लोग सड़क पर ही आसरा लेने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों सुबोध मलिक, रीता देवी और अन्य प्रभावित लोगों ने जिला प्रशासन से प्लास्टिक, खाने-पीने का सामान और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रहे बाढ़ के पानी के कारण और ज्यादा बढ़ गई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद को लेकर अंचलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि सरकार के आदेश के अनुसार यदि किसी बाढ़ प्रभावित परिवार में 72 घंटे तक चूल्हा नहीं जलता है, तो उसे सूखा राशन दिया जाता है या सामुदायिक रसोई शुरू की जाती है।
उन्होंने बताया कि इलाके में पानी दो दिनों के अंदर बढ़ना शुरू हुआ है। पानी अधिक बढ़ने के कारण कुछ लोग पलायन कर रहे हैं और ऊंची जगहों पर शरण ले रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए प्रशासन की ओर से अस्थायी रूप से प्लास्टिक उपलब्ध कराया जा रहा है।
अंचलाधिकारी ने कहा कि जल्द ही सामुदायिक रसोई भी शुरू की जाएगी। फिलहाल मुख्य रूप से तीन पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं और प्रशासन सभी प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की गाइडलाइन के अनुसार बाढ़ प्रभावित लोगों को जो भी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, उन्हें मुहैया कराया जाएगा।