पतंजलि फूड पार्क से हटी सीआईएसएफ सुरक्षा: गृह मंत्रालय ने खत्म किए सभी 34 पद, जानिए क्या था 2015 का पूरा विवाद
उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क से सीआईएसएफ की सुरक्षा हटा ली गई है, और गृह मंत्रालय ने सभी 34 स्वीकृत पद समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क का मुख्य द्वार और कार्यक्रम में बोलते हुए योग गुरु बाबा रामदेव।
उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित बाबा रामदेव के पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क कैंपस से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सुरक्षा हटा ली गई है। गृह मंत्रालय ने सुरक्षा विंग के सभी 34 पदों को पूरी तरह खत्म करने का निर्देश जारी कर दिया है।
हरिद्वार स्थित इस फूड पार्क में बीते मई महीने में सीआईएसएफ ने अपनी सुरक्षा हटा ली थी। सुरक्षा हटाने के बाद गृह मंत्रालय ने सीआईएसएफ की इस सुरक्षा विंग में स्वीकृत सभी 34 पदों को समाप्त करने का आदेश दिया है। इस सुरक्षा विंग की मौजूदा स्वीकृत संख्या में 1 असिस्टेंट कमांडेंट, 4 सब इंस्पेक्टर, 2 एएसआई, 11 हेड कांस्टेबल और 16 सिपाही शामिल थे। इसके साथ ही मंत्रालय ने बकाया भुगतान के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं।
बता दें कि जून 2025 से सीआईएसएफ यहां सुरक्षा प्रदान कर रही थी। यहां सीआईएसएफ की तैनाती साल 2015 में हुई एक हिंसक घटना के बाद की गई थी। वर्ष 2015 में बाबा रामदेव के पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क में कंपनी के सुरक्षा गार्डों और स्थानीय ट्रक यूनियन के समर्थकों के बीच खूनी झड़प हो गई थी। इस हिंसक झड़प के दौरान फैक्ट्री कर्मचारियों और ट्रक यूनियन के सदस्यों के बीच जमकर संघर्ष हुआ था और गांव वालों ने भी फूड पार्क पर हमला बोल दिया था।
इस घटना के दौरान एक दर्जन से ज्यादा ट्रकों में तोड़फोड़ की गई थी, जिसमें 12 से अधिक लोग घायल हो गए थे और फायरिंग के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई थी। इस मामले में पुलिस ने बाबा रामदेव के छोटे भाई रामभगत को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में सामने आया था कि यह पूरा विवाद फूड पार्क में ट्रक मंगाने को लेकर शुरू हुआ था। फूड पार्क प्रबंधन द्वारा स्थानीय ट्रक यूनियन की बजाय बाहर से ट्रक मंगवाए जाने के कारण यह विवाद भड़का था, क्योंकि पहले बाबा रामदेव स्थानीय गांव के लोगों की ट्रक यूनियन से ही ट्रक लिया करते थे।