महाराष्ट्र के तुलसी गांव में संकट: सिंचाई के लिए पानी न होने पर ग्रामीणों ने लगाया 'गांव बिकने के लिए है' का पोस्टर|
सोलापुर के तुलसी गांव में 45 दिनों से बारिश न होने और सिंचाई का पानी न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने गांव बेचने के पोस्टर लगा दिए हैं।
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तुलसी गांव के बाहर पानी की गंभीर समस्या और सिंचाई के अभाव के विरोध में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए गांव बिक्री के पोस्टर का दृश्य।
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तुलसी गांव में इन दिनों अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिल रही है, जहां पानी के गंभीर संकट से परेशान होकर ग्रामीणों ने गांव के बाहर "गांव बिकने के लिए है" के पोस्टर लगा दिए हैं। दशकों से सिंचाई के लिए पानी का इंतजार कर रहे निवासियों का यह कदम उनके गुस्से, तंज और गहरी बेचैनी को साफ तौर पर बयां करता है।
तुलसी गांव के सरपंच शरद मोरे ने तीखे लहजे में कहा कि जो कोई भी हमारा गांव खरीदना चाहता है, वह आगे आ सकता है। बाहरी लोगों के लिए यह पोस्टर भले ही एक मजाक या मजेदार बात लग सकता है, लेकिन यह इस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि सरकार पिछले 25 सालों से उन्हें किस तरह बेवकूफ बना रही है।
विडंबना यह है कि तुलसी गांव सीना-माढ़ा लिफ्ट सिंचाई योजना से केवल 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसकी शुरुआत साल 2000 में हुई थी। हालांकि, इस योजना का एक प्रतिशत भी फायदा इस गांव को नहीं मिला है। आसपास के अन्य गांवों में जहां अधिक पानी की खपत वाली नकदी फसलें उगाई जाती हैं, वहीं तुलसी गांव के किसान हर साल अनिश्चित और बेमौसम बारिश का आस लगाए देखते रहते हैं।
जिला रिकॉर्ड के अनुसार, माढ़ा क्षेत्र के कई गांवों में पिछले 45 दिनों से एक बूंद भी बारिश नहीं हुई है। इसके चलते तुलसी गांव के सभी जलाशय या तो सूख चुके हैं या उनमें नाममात्र का पानी बचा है। इसके अलावा, गांव के कुएं और परकोलेशन झीलें भी पूरी तरह सूख चुकी हैं। सरपंच शरद मोरे ने चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें जुलाई महीने से पीने के लिए टैंकरों का पानी मिल रहा है और अगर मानसून पूरी तरह विदा हो गया, तो गांव की लगभग 2,700 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह बंजर हो जाएगी।
इस विकट परिस्थिति से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। उन्होंने तहसीलदार को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा था, जिसमें आत्मदाह करने और आगामी चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करने की चेतावनी भी शामिल थी। हालांकि, महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के साथ बातचीत के बाद ग्रामीणों ने शुक्रवार को अपना यह विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया।
इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। सोलापुर जिले के कलेक्टर एस. कार्तिकेयन ने जानकारी दी है कि सिंचाई विभाग द्वारा तुलसी गांव का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे पूरा कर लिया गया है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि सर्वे के नतीजों और रिपोर्ट के आधार पर गांव को नहर नेटवर्क से जोड़ने के लिए जल्द ही राज्य सरकार को आधिकारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा।