दिल्ली-NCR में महिलाओं की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पार्क से मेट्रो स्टेशन तक होगी जांच, बनेंगे संवेदनशील इलाकों के नक्शे |
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में महिलाओं की सुरक्षा पर सख्त रुख अपनाते हुए संवेदनशील इलाकों का सुरक्षा ऑडिट करने और हर जिले में विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की इमारत नई दिल्ली में जहां अदालत ने दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा को लेकर ऐतिहासिक निर्देश जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार, 28 सितंबर 2026 को ऐतिहासिक और सख्त निर्देश जारी किए| अदालत ने दिल्ली पुलिस को संवेदनशील इलाकों का तत्काल सर्वे और सुरक्षा ऑडिट करने का आदेश दिया है| इसके साथ ही, दिल्ली पुलिस कमिश्नर को हर पुलिस जिले के लिए एक विशेष टीम गठित करने को कहा गया है, जिसकी अगुवाई डीएसपी (DSP) रैंक से नीचे का कोई अधिकारी नहीं करेगा。 यह पूरी व्यवस्था चार सप्ताह के भीतर तैयार की जानी है|
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस सुरक्षा ऑडिट का आधार राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े, स्थानीय खुफिया जानकारी, पूर्व व वर्तमान शिकायतें और पहले हुई घटनाएं होनी चाहिए| प्रत्येक जिले का एक संवेदनशीलता मानचित्र (सेंसिटिविटी मैप) तैयार करके उसे आसपास के थानों के साथ साझा किया जाए, ताकि आदतन अपराधियों और अपराध के पैटर्न की जानकारी सिर्फ एक थाने तक सीमित न रहे|
अदालत ने सभी चिन्हित सार्वजनिक पार्कों और संवेदनशील क्षेत्रों में शाम, देर रात और सुबह के शुरुआती घंटों में उचित पुलिस गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है| इसके अलावा, सार्वजनिक पार्कों, मेट्रो स्टेशनों, बस स्टॉप, बस टर्मिनलों, रेलवे स्टेशनों और अन्य प्रमुख परिवहन केंद्रों पर लाइटिंग और सीसीटीवी (CCTV) व्यवस्था का तत्काल ऑडिट करने को कहा गया है, ताकि खराब कैमरों और लाइटों को जल्द दुरुस्त किया जा सके | सीएम जनसुनवाई पोर्टल जैसे मौजूदा शिकायत निवारण तंत्र का उपयोग करके अंधेरे रास्तों और असुरक्षित प्रवेश बिंदुओं की शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
कानूनी और आधिकारिक मोर्चे पर, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से चार सप्ताह के भीतर फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट और विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालतों की मौजूदा स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही, दिल्ली पुलिस से नेशनल डेटाबेस ऑन सेक्सुअल ऑफेंडर्स (NDSO) और गृह मंत्रालय के इन्वेस्टिगेशन ट्रैकिंग सिस्टम फॉर सेक्सुअल ऑफेंसेज (ITSSO) के नियमित इस्तेमाल की जानकारी मांगी गई है。 कोर्ट ने मिशन शक्ति, 112 इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम, 181 महिला हेल्पलाइन और सेफ सिटी प्रोजेक्ट की वास्तविक कार्यप्रणाली की रिपोर्ट भी मांगी है।
इस स्वतः संज्ञान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी किया है तथा वरिष्ठ अधिवक्ता लिज मैथ्यू को न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया है。 मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि साउथ दिल्ली के कॉलेज की छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न की बार-बार शिकायतें किए जाने के बावजूद पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया। पीठ ने चलती स्लीपर बस में नाबालिग के साथ हुए कथित उत्पीड़न को 2012 के निर्भया कांड की “दर्दनाक गूंज” करार देते हुए तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अनुच्छेद 21 के तहत भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है, और प्रशासनिक कमियों के कारण सार्वजनिक स्थलों को उच्च जोखिम वाले क्षेत्र बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती।