मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिरप कांड के दो आरोपियों को मिली जमानत|
छिंदवाड़ा के बहुचर्चित सिरप कांड में कोर्ट ने दो आरोपियों को दी जमानत, लेकिन अन्य मामलों के कारण फिलहाल जेल से रिहाई नहीं होगी।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर का भवन जहां मामले की सुनवाई हुई।
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित कोल्ड्रिफ सिरप कांड में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय सुनाते हुए दो आरोपियों को जमानत प्रदान की है। यह मामला राज्य के छिंदवाड़ा जिले से जुड़ा है, जहां जहरीली दवा के सेवन के कारण 27 मासूम बच्चों की मृत्यु हो गई थी। इस त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और इसके बाद प्रशासन ने जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय को इस मामले में कानूनी दृष्टिकोण से एक बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
अदालत ने जिन दो व्यक्तियों को जमानत दी है, उनमें केमिकल सप्लायर शैलेष सी पांड्या और कंपनी के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव सतीश रघुवंशी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने इन्हें अलग-अलग प्रकरणों में राहत दी है। शैलेष सी पांड्या को परासिया थाने में दर्ज मामले में जमानत मिली है, जबकि सतीश रघुवंशी को छिंदवाड़ा कोतवाली में दर्ज मामले के तहत राहत प्रदान की गई है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मुकेश मरार ने स्पष्ट किया कि कोल्ड्रिफ सिरप कांड में यह पहली बार है जब किसी आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत प्राप्त हुई है। इससे पूर्व विभिन्न स्तरों पर दायर की गई सभी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।
यद्यपि हाईकोर्ट ने जमानत के आदेश जारी कर दिए हैं, किंतु इन आरोपियों की तत्काल जेल से रिहाई संभव नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग थानों में अनेक एफआईआर दर्ज हैं। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, उन्हें अन्य लंबित मामलों में भी संबंधित न्यायालयों से जमानत लेनी होगी, जिसके पश्चात ही उनकी रिहाई सुनिश्चित हो सकेगी। इस प्रकार, वर्तमान निर्णय उन्हें एक मामले में राहत प्रदान करता है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताओं के चलते उनकी जेल से बाहर आने की राह अभी बाकी है।
यह संपूर्ण प्रकरण उस समय चर्चा में आया था जब जहरीली सिरप के वितरण और बिक्री से जुड़े तथ्य सामने आए थे। एसआईटी ने अपनी जांच के दौरान सतीश रघुवंशी को 26 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया था। वहीं, जांच दल ने 20 नवंबर 2025 को तमिलनाडु से शैलेष सी पांड्या को हिरासत में लिया था। तब से ही दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में थे। बच्चों की मृत्यु की गंभीरता को देखते हुए यह मामला अत्यधिक संवेदनशील रहा है, जिसके कारण न्यायिक प्रक्रिया में अत्यंत सावधानी बरती जा रही है।
हाईकोर्ट का यह रुख मामले की चल रही जांच और कानूनी कार्रवाई के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ है। हालांकि आरोपियों को कुछ मामलों में राहत मिली है, परंतु मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक प्रक्रिया निरंतर जारी है। आने वाले समय में अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई और इस संपूर्ण प्रकरण के मुकदमे पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी रहेंगी। अदालत का यह निर्णय इस जटिल कानूनी लड़ाई में एक नया अध्याय जोड़ता है।