दिल्ली में Gen Z प्रोटेस्ट पर फिदा हुए पाकिस्तानी पत्रकार मोईद पीरजादा, असीम मुनीर को दी चेतावनी|
पाकिस्तानी पत्रकार मोईद पीरजादा ने दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन और लोकतंत्र की सराहना की।
पाकिस्तानी पत्रकार मोईद पीरजादा वीडियो संदेश में नई दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के संदर्भ में चर्चा करते हुए।
राजधानी दिल्ली में पिछले एक महीने से चल रहे छात्र प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है, जिस पर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकारों और युवाओं की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के सीनियर पत्रकार मोईद पीरजादा ने एक वीडियो संदेश में भारत में हुए छात्र आंदोलन और लोकतांत्रिक व्यवस्था की खुले दिल से सराहना की है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दिल्ली की सड़कों पर युवा छात्रों और छोटी-छोटी बच्चियों ने अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया और सरकार को अपने फैसले पर झुकने के लिए मजबूर किया, वह पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर और देश की व्यवस्था के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
मोईद पीरजादा ने भारत और पाकिस्तान की व्यवस्थाओं की तुलना करते हुए अपने देश की तानाशाही पर गहरा गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि भारत के 'जेन जेड' (Gen Z) प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि वहां एक मजबूत लोकतंत्र कायम है, जहां नागरिकों को अपनी आवाज उठाने की पूरी आजादी है। इसके विपरीत, पाकिस्तान में तानाशाही के माहौल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां इस तरह के स्वतंत्र प्रदर्शन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में शांतिपूर्ण मार्च के ऐलान मात्र से ही पुलिस और प्रशासन कार्यकर्ताओं के घरों की दीवारें फांदकर लोगों को जबरन उठा लेते हैं, जिससे यह साफ होता है कि वहां अच्छे और सामान्य नागरिकों के लिए सुरक्षित माहौल नहीं बचा है।
पाकिस्तानी पत्रकार ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि आज पाकिस्तान में किसी भी साधारण इंसान का घर, इज्जत, संपत्ति और निजता सुरक्षित नहीं रह गई है। उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह देश केवल अपराधियों और हथियारबंद गिरोहों के लिए ही बना है, जहां ताकतवर लोग कानून को अपने हाथ में लेते हैं। दिल्ली में हुए इस प्रदर्शन को लेकर पाकिस्तान के युवाओं के बीच भी काफी उत्साह और समर्थन देखा गया है। विभिन्न मीडिया मंचों से बात करते हुए पाकिस्तानी युवाओं ने कहा कि पड़ोसी देश में अपनी ही उम्र के युवाओं को अधिकारों के लिए लड़ते और जीत हासिल करते हुए देखना उनके लिए एक उम्मीद की किरण जैसा है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बीते एक महीने से कॉकरोच जनता पार्टी और विभिन्न वामपंथी छात्र संगठनों के बैनर तले जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन किया जा रहा था। नीट परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त था और वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए थे। छात्रों के इस दबाव और राष्ट्रव्यापी चर्चा के बीच आखिरकार 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भारतीय छात्रों के इस ऐतिहासिक संघर्ष और परिणाम की गूंज न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी प्रमुखता से छाई रही।
द न्यूयॉर्क टाइम्स, सीएनएन, अल जजीरा और पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र 'डॉन' समेत दुनिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे युवा छात्र शक्ति की एक बड़ी जीत के रूप में रेखांकित किया है। जानकारों का मानना है कि लोकतांत्रिक देशों में जनता की आवाज और युवाओं का यह सामूहिक संघर्ष सरकारों को पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए विवश करता है, और दिल्ली के इस छात्र आंदोलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में आम नागरिकों की इच्छाशक्ति सबसे सर्वोपरि होती है।