मन की बात में पीएम मोदी ने कारगिल के वीरों को किया नमन, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर दिया जोर|

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को नमन किया और देश की बढ़ती रक्षा ताकत व तकनीकी आत्मनिर्भरता का जिक्र किया।

Update: 2026-07-26 07:04 GMT

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में मन की बात कार्यक्रम के दौरान देश को संबोधित करते हुए कारगिल विजय दिवस और रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों पर चर्चा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के माध्यम से एक बार फिर देशवासियों को संबोधित किया और राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा तकनीकी आत्मनिर्भरता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। आज के संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक 'कारगिल विजय दिवस' का विशेष रूप से स्मरण किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक दिन प्रत्येक भारतीय के हृदय को गर्व और सम्मान के भाव से भर देता है, जो हमें 1999 के उस भीषण युद्ध की याद दिलाता है जब भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों ने दुर्गम और ऊंची-ऊंची पहाड़ियों, बेहद कठिन मौसम तथा दुश्मन की हर चुनौती का डटकर सामना किया था। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि हमारे सैनिकों का हौसला और अदम्य साहस किसी भी परिस्थिति और चुनौती से कहीं अधिक बड़ा था, जिन्होंने मां भारती की संप्रभुता और रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी।

कारगिल के वीर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि आज का भारत केवल अपने वीर सपूतों की शहादत को याद भर नहीं करता, बल्कि उनकी प्रेरणादायक गाथाओं को देश की युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का भी निरंतर प्रयास कर रहा है। इसी राष्ट्रीय भावना और संकल्प को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष एक विशेष 'शौर्य विजय यात्रा' का आयोजन किया गया है। गत 14 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से आरंभ हुई यह मोटरसाइकिल यात्रा अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल तक पहुंचेगी। इस पूरी यात्रा का मुख्य वैचारिक संदेश 'वन राइड, वन नेशन, वन सेल्यूट' रखा गया है, जो देश को यह संदेश देता है कि राष्ट्र की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों के ऋण को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य शक्ति के विस्तार पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने देश की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षेत्र में हासिल हो रही ऐतिहासिक सफलताओं का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत केवल अपने सैनिकों की वीरता के बल पर ही आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात और मित्र देशों के साथ रणनीतिक सहयोग के मोर्चे पर भी अपनी तकनीकी क्षमता को लगातार सुदृढ़ कर रहा है। कुछ समय पूर्व ही भारतीय नौसेना के बेड़े में 'आईएनएस महेंद्रगिरि' को शामिल किया गया है, जिसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस अत्याधुनिक जंगी जहाज को पूरी तरह से भारत के भीतर ही डिजाइन किया गया है और स्वदेशी तकनीक से ही इसका निर्माण किया गया है। इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से अधिक सामग्री पूरी तरह से स्वदेशी है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन की बढ़ती हुई ताकत का एक स्पष्ट प्रतीक है।

तकनीकी प्रगति की इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ की हालिया सफलताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इसी महीने डीआरडीओ द्वारा 'पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट' का अत्यंत सफल परीक्षण किया गया है, जिसके पीछे देश के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का अथक परिश्रम और सामूहिक सहयोग शामिल है। इसके साथ ही, पिछले कुछ दिनों के भीतर ही डीआरडीओ ने 'कुशा मिसाइल' का भी सफल परीक्षण किया है, जो देश की मिसाइल रक्षा प्रणाली को और अधिक अभेद्य बनाता है। रक्षा उत्पादन और वैश्विक साझेदारी के संदर्भ में उन्होंने हाल ही में अपनी इंडोनेशिया यात्रा का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वहां ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की आपूर्ति को लेकर एक बड़ा समझौता संपन्न हुआ है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आज वैश्विक मंच पर भारत के रक्षा उपकरणों और अत्याधुनिक तकनीक पर दुनिया का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में देश के युवाओं और नागरिकों को एकजुट होकर देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन से लेकर कूटनीतिक सहयोग और अंतरिक्ष अनुसंधान तक, हर क्षेत्र में भारत नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। 'मन की बात' के इस संस्करण के माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश को याद दिलाया कि राष्ट्र की सुरक्षा, शहीदों का सम्मान और तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही एक सशक्त और विकसित भारत की नींव हैं। आज जब देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो यह हर नागरिक के लिए गौरव का विषय है कि भारत अब आयात करने वाले देश से निकलकर दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातक देशों की पंक्ति में अपनी मजबूत जगह बना रहा है।

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