भारत दौरे पर आए लक्जमबर्ग के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को एक और यूरोपीय देश का मजबूत समर्थन मिला है। लक्जमबर्ग के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल ने भारत की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार करना जरूरी हो गया है।

भारत दौरे पर आए जेवियर बेटेल ने सोमवार को UNSC में भारत को स्थायी सीट दिए जाने के सवाल पर कहा कि भारत के आकार, महत्व और वैश्विक भूमिका को देखते हुए यह समझना मुश्किल है कि वह अब तक सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य क्यों नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 10 की जाती है, तो भारत को उसमें जरूर शामिल किया जाना चाहिए।

बेटेल ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सुरक्षा परिषद के विस्तार की किसी भी योजना में भारत को जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने इसके साथ ब्राजील जैसे अन्य बड़े देशों को भी परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व देने की जरूरत बताई।

जेवियर बेटेल ने कहा कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना आज की दुनिया की वास्तविकता को पूरी तरह नहीं दर्शाती। दुनिया में राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक बदलाव हुए हैं, लेकिन UNSC का ढांचा लंबे समय से लगभग उसी रूप में बना हुआ है। इसलिए परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला और वर्तमान वैश्विक व्यवस्था के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।

लक्जमबर्ग के विदेश मंत्री ने केवल सुरक्षा परिषद के विस्तार की बात नहीं की, बल्कि वीटो पावर में बदलाव का भी समर्थन किया। उन्होंने मौजूदा वीटो व्यवस्था की आलोचना करते हुए इसे दूसरे विश्व युद्ध के दौर की निशानी बताया। उनका कहना था कि आज की दुनिया में किसी एक देश के पास अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक फैसले को रोकने की इतनी बड़ी शक्ति होना उचित नहीं है।

बेटेल ने कहा कि वह ऐसे सुधार के पक्ष में हैं, जिसमें सुरक्षा परिषद के दो-तिहाई बहुमत के जरिए वीटो को रद्द किया जा सके। उनके अनुसार, परिषद का विस्तार करने के साथ-साथ वीटो व्यवस्था में भी बदलाव होना चाहिए, ताकि कोई एक देश सामूहिक निर्णयों को हमेशा के लिए रोक न सके।

जेवियर बेटेल 7 से 9 सितंबर तक तीन दिन की आधिकारिक भारत यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के दौरान वह चेन्नई भी जाएंगे, जहां वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। भारत यात्रा के दौरान उनके बयान को UNSC सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि मौजूदा सुरक्षा परिषद की संरचना आज की दुनिया की वास्तविकता को नहीं दिखाती। इसका मौजूदा ढांचा मुख्य रूप से 1945 के बाद की भू-राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाता है। तब दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक ताकतों का स्वरूप आज से काफी अलग था।

भारत का कहना है कि पिछले आठ दशकों में दुनिया में बड़े बदलाव हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या भी 1945 की तुलना में लगभग चार गुना बढ़ चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का ढांचा काफी हद तक उसी समय की परिस्थितियों पर आधारित है।

19 अगस्त 2026 को भारत ने UNSC में काम करने के तरीकों पर हुई खुली बहस के दौरान भी सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार की जरूरत पर जोर दिया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की चार्ज डी'अफेयर्स योजना पटेल ने कहा था कि सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट और जरूरी हो गई है।

योजना पटेल ने कहा था कि 1945 की दुनिया अब पूरी तरह बदल चुकी है और संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता तब से चार गुना बढ़ गई है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि करीब आठ दशक पहले हुए संघर्ष और उस समय की परिस्थितियों के आधार पर सुरक्षा परिषद के गठन और काम करने के तरीकों को हमेशा के लिए तय नहीं किया जा सकता।

ऐसे समय में लक्जमबर्ग के उप-प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल का भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष में खुलकर सामने आना नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। उनका बयान UNSC में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व देने की बढ़ती मांग के बीच आया है। भारत लगातार यह तर्क देता रहा है कि दुनिया की बदलती वास्तविकताओं के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्था में भी बदलाव होना चाहिए।