भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ा सुस्ता विवाद! सेना की बढ़ी हलचल, नेपाल से भारत ने मांगा जवाब|

नेपाल सरकार द्वारा सुरक्षा तैनाती बढ़ाने के बाद सीमा पर बढ़ा तनाव, सुस्ता क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच गहराया विवाद।

Update: 2026-07-13 08:31 GMT

सुस्ता सीमा क्षेत्र में तैनात भारतीय सुरक्षा बल और नक्शे में स्थित क्षेत्र को दर्शाती तस्वीर।

भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित सुस्ता क्षेत्र एक बार फिर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी चर्चा का केंद्र बन गया है। हाल के दिनों में नेपाल की बालेन शाह सरकार द्वारा इस संवेदनशील इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने के आदेश के बाद तनाव की स्थिति देखी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस आदेश के बाद नेपाल की एक सैन्य टीम ने भी इस क्षेत्र का दौरा किया, जिसका नेतृत्व मेजर जनरल यम बहादुर ने किया। नेपाली मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है कि सीमा क्षेत्र में तैनात भारतीय सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों ने नेपाली सैन्य टीम को रोककर उनसे पूछताछ की थी, जिसके बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया। इस पूरे प्रकरण को लेकर भारत ने नेपाल के विदेश मंत्रालय से स्पष्टीकरण भी मांगा है।

सुस्ता को लेकर वर्तमान तनाव की शुरुआत मई माह के अंत में हुई थी, जब गंडक नदी (जिसे नेपाल में नारायणी नदी कहा जाता है) के किनारे तटबंध निर्माण के कार्य को लेकर दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच असहमतियां सामने आईं। पिछले महीने जब भारतीय सुरक्षा बल पुनः तटबंध के पूर्वी हिस्से पर पहुंचे, तो वहां भी कार्य को रोकने को लेकर स्थिति गंभीर हो गई। सुस्ता का यह भौगोलिक क्षेत्र लंबे समय से विवाद का विषय रहा है, जो भारत के बिहार राज्य के पश्चिमी चंपारण जिले और नेपाल के नवलपरासी जिले के बीच गंडक नदी के किनारे बसा है। नेपाल का आधिकारिक दावा है कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से उसका हिस्सा रहा है और 1965 में तत्कालीन राजा महेंद्र ने यहां 400 परिवारों को बसाया था। हालांकि, 1977 में गंडक नदी द्वारा अपना मार्ग परिवर्तन करने से यहां की बस्तियां प्रभावित हुईं, जिससे सीमा निर्धारण को लेकर जटिलताएं उत्पन्न हो गईं।

सुस्ता के बड़े भूभाग पर वर्तमान में नेपाल का कब्जा है, जिसके पीछे का इतिहास काफी विवादास्पद रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, 1977 के बाद जब नदी ने मार्ग बदला, तो इस क्षेत्र में स्थानीय गिरोह सक्रिय हो गए, जिनमें मुन्ना खान नामक एक व्यक्ति का नाम प्रमुखता से आता है। आरोप है कि मुन्ना खान ने स्थानीय राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठाते हुए बड़ी मात्रा में जमीन पर कब्जा किया और 1983 में वाल्मीकिनगर के तत्कालीन दारोगा की हत्या कर दी। उसने कथित तौर पर इस क्षेत्र पर नेपाल का अधिकार स्थापित करने में एक बड़ी भूमिका निभाई थी। विडंबना यह है कि जिसने जमीन पर कब्जे के लिए देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया, उसे आज भी नेपाल ने अपने देश की नागरिकता प्रदान नहीं की है, और मुन्ना खान तथा उसके समर्थक आज भी नागरिकता की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के एक बयान ने इस विवाद को एक नया मोड़ दिया है। प्रतिनिधि सभा में चर्चा के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि केवल भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी भारत की भूमि के कई हिस्सों पर कब्जा किया है, और इस मामले पर दोनों देशों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उनके इस स्वीकारोक्ति पर नेपाल के भीतर ही राजनीतिक हलकों में काफी हंगामा मचा। भारत और नेपाल के बीच का यह सुस्ता विवाद न केवल एक भौगोलिक प्रश्न है, बल्कि यह सुरक्षा, इतिहास और कूटनीतिक संवेदनशीलता का एक जटिल संगम बन चुका है। सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि दोनों देश बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान निकालें ताकि शांति और स्थिरता बनी रहे।

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