मंगोलपुरी फैक्टरी हादसे में बुझे 4 घरों के चिराग, अपनों को खोने का गम, ऊपर से आर्थिक तंगी और बेरुखी की मार|
मंगोलपुरी फैक्ट्री में लगी भीषण आग से चार परिवारों के कमाने वाले सदस्यों की जान चली गई, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
मंगोलपुरी स्थित वह बहुमंजिला फैक्ट्री भवन जहां भीषण आग लगने से चार मजदूरों की मौत हो गई|
दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में एक फैक्टरी में लगी भीषण आग ने चार परिवारों के मुख्य कमाने वाले सदस्यों की जिंदगी छीन ली है। इस दर्दनाक हादसे के बाद अब इन पीड़ित परिवारों के सामने दुखों का पहाड़ तो टूटा ही है, साथ ही भयंकर आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि एक पीड़ित के पिता को दिल्ली आने के लिए दूसरों से कर्ज लेना पड़ा, तो वहीं अन्य परिवार अपनों के शव को अपने गांव ले जाने के लिए जद्दोजहद करते नजर आए। परिजनों का यह भी आरोप है कि न तो प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई मदद मिली और न ही फैक्टरी मालिक ने उनकी सुध ली है। घटना के बाद से फैक्टरी मालिक का फोन भी लगातार स्विच ऑफ आ रहा है।
कर्ज लेकर दिल्ली पहुंचे अशोक के पिता
मृतक अशोक के फूफा उमेश ने इस दुखद स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि जब उन्हें बेटे की मौत की खबर मिली, तो उसके पिता नागेंद्र बिहार के नालंदा से तुरंत फ्लाइट लेकर दिल्ली पहुंचे। लेकिन उनके पास टिकट के पैसे तक नहीं थे, जिसके कारण उन्हें उधार या कर्ज लेना पड़ा। उनका परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा था, और इस हादसे ने उनकी कमर तोड़ दी है। उमेश के अनुसार, फैक्टरी के मालिक की तरफ से पीड़ित परिवार को कोई भी आर्थिक सहायता नहीं दी गई है। हालांकि, पास की ही एक दूसरी फैक्टरी के मालिक ने मानवीय दृष्टिकोण दिखाते हुए 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद जरूर की है। अब इस परिवार के सामने अपने घर को चलाने और भविष्य के खर्चों को लेकर गहरी चिंता सता रही है।
पोस्टमार्टम के बाद शवों को गांवों के लिए किया गया रवाना
प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत मृतकों के शवों के पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी की गई:
- रविवार को हुआ इन का पोस्टमार्टम: अशोक और लालबाबू के परिजनों के समय पर दिल्ली नहीं पहुँच पाने के कारण उनके पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में एक दिन की देरी हुई, जो रविवार को पूरी कराई गई। इसके तुरंत बाद अशोक के पिता अपने बेटे का शव लेकर नालंदा स्थित अपने पैतृक गांव के लिए रवाना हो गए। वहीं, लालबाबू का बेटा मुकेश एम्बुलेंस के जरिए उनके शव को लेकर उत्तर प्रदेश के देवरिया के लिए निकला।
- शनिवार को पूरे हुए अन्य दो पोस्टमार्टम: इससे पहले शनिवार को ही प्रेमचंद और हरिहर के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा चुका था।चारों मृतकों के यह गरीब परिवार अब अपने घर के चिराग को हमेशा के लिए खोने के गम में डूबे हुए हैं और शासन-प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं।