पुरानी दिल्ली इमारत ढहने का मामला- मलबे में अभी भी दो लोगों के फंसे होने की आशंका, राहत कार्य तेज
पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार में चार मंजिला इमारत गिरने के बाद 22 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि एनडीआरएफ की टीम मलबे में फंसे 2 लोगों की तलाश कर रही है।
पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार में चार मंजिला इमारत ढहने के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य में जुटी एनडीआरएफ की टीम।
पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक और व्यस्त इलाके चावड़ी बाजार में एक चार मंजिला इमारत के ढह जाने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे को लगभग 20 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य अभी भी पूरी मुस्तैदी के साथ जारी है। इस पूरी दुर्घटना में अब तक दो लोगों के शव मलबे से बाहर निकाले जा चुके हैं, जबकि प्रशासन और राहत टीमों का कहना है कि मलबे में अभी भी दो और लोगों के फंसे होने की आशंका बनी हुई है। आइए जानते हैं इस दुर्घटना से जुड़ी सभी मुख्य और प्रामाणिक बातें।
कैसे और कब हुआ हादसा?
चावड़ी बाजार की 'गली शीश महल' में एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत गुरुवार की सुबह करीब 9:30 बजे अचानक भरभरा कर गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और आपातकालीन सेवाएं हरकत में आ गईं। अधिकारियों के अनुसार, चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास 'गली सितारा' में इमारत गिरने की यह सूचना सुबह 9:50 बजे मिली थी, जिसके तुरंत बाद दमकल विभाग की छह गाड़ियों को फौरन घटनास्थल के लिए रवाना किया गया था। इस भयंकर हादसे के बाद से ही लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। लापरवाही के इस मामले में कार्रवाई करते हुए एमसीडी (महानगर निगम) ने तुरंत प्रभाव से एक सहायक अभियंता और एक कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया है।
60 गज के प्लॉट पर बनी थी चार मंजिला इमारत
मौके पर मौजूद एसडीएम मनोज कुमार ने मीडिया को जानकारी दी कि जिस प्लॉट पर यह मकान बना था, उसका क्षेत्रफल करीब 60 गज था और इस पर चार मंजिला इमारत खड़ी की गई थी। इमारत के गिरने के बाद भारी मलबा जमा हो गया, जो बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर से भी ऊपर तक फैल गया।
दुर्घटना के बाद इमारत की कुछ मंजिलों की दीवारें बीच हवा में ही अटक गईं। उनकी स्थिति और ऊंचाई ऐसी थी कि वहां तक क्रेन को ले जाना पूरी तरह असंभव साबित हुआ। इन खतरनाक दीवारों को हटाने के लिए प्रशासन को अलग से विशेष इंतजाम करने पड़े।
बचाव कार्य में क्यों आ रही हैं मुश्किलें?
एसडीएम ने बताया कि आसपास की दीवारों पर अटकी हुई ईंटें लगातार नीचे गिर रही थीं। यदि रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे कर्मचारियों पर ये ईंटें गिर जातीं, तो उनकी जान को भी बड़ा खतरा हो सकता था। यही कारण रहा कि सबसे पहले इन असुरक्षित दीवारों और ईंटों को हटाने में काफी समय लगा।
इसके बाद, इमारत के कुछ लोहे के कॉलम टेढ़े होकर लटक गए थे, जिससे बचाव दल का अंदर जाने का रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया था। टीम ने पहले इन भारी कॉलमों को काटकर अंदर जाने का रास्ता बनाया। रास्ता साफ होने के बाद अब लैंटर के स्लैब को सावधानी से काटकर मलबे से अलग किया जा रहा है। यह प्रक्रिया बेहद मेहनत और सूझबूझ वाली है, क्योंकि इसमें कर्मचारियों की सुरक्षा का ध्यान रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
22 लोगों को सुरक्षित निकाला गया बाहर
राहत और बचाव कार्यों के बीच एक राहत भरी खबर यह रही कि एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने मलबे का एक बड़ा हिस्सा हटाकर रास्ता बना लिया है। हालांकि, बेसमेंट में अभी भी कुछ मलबा फंसा हुआ है।
इमारत के ठीक सामने स्थित एक अन्य मकान में 22 लोग फंस गए थे। एनडीआरएफ की टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए वहां तक पहुंचने का सुरक्षित रास्ता साफ किया और अंदर फंसे सभी 22 लोगों को सकुशल बाहर निकाल लिया।
प्रशासन के अनुसार, शुरुआत में अधिकारियों की ओर से किसी के भी मलबे में दबे होने की आशंका को खारिज किया गया था, लेकिन कुछ ऐसे लोगों की जानकारी सामने आई है जिनके परिवार के सदस्य घटनास्थल पर नहीं मिल रहे हैं और उनके मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ या बंद आ रहे हैं। इसी आधार पर अब यह आशंका जताई जा रही है कि मलबे में अभी भी दो लोग फंसे हो सकते हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक बचाव अभियान पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक ऑपरेशन जारी रहेगा।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों की जुबानी
इस दर्दनाक हादसे ने आसपास के लोगों को दहशत में डाल दिया है। एक स्थानीय निवासी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, "मुझे सुबह करीब 9:30 बजे यह पता चला कि हमारे घर के बिल्कुल बगल वाली इमारत ढह गई है। मेरे परिवार के लोगों ने मुझे तुरंत फोन किया, जिसके बाद मैं अपना काम बीच में ही छोड़कर भागा-भागा यहां पहुंचा ताकि देख सकूं कि आखिर क्या हुआ है।" उन्होंने बताया कि इस नई इमारत का निर्माण कुछ महीने पहले ही शुरू हुआ था और मलबे के नीचे कुछ मजदूर भी फंस गए।
एक अन्य स्थानीय महिला ने खौफनाक मंशा को याद करते हुए बताया, "अचानक एक बहुत तेज और जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। इस आवाज से हम सभी बुरी तरह डर गए और तुरंत घर के सभी सदस्यों को बाहर निकलने के लिए कहा। जब हम बाहर आए तो हमने पुलिसकर्मियों को भारी संख्या में देखा और चारों तरफ धूल व मलबे का ढेर बिखरा हुआ था। हादसे के बाद पूरी सड़क को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया था।"
फिलहाल, घटनास्थल पर एनडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई हैं ताकि मलबे में फंसे बाकी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।