अमेरिका में अमेरिकी ध्वज के सामने और एक अन्य जगह पर अपनी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू के साथ नजर आ रहे नवनिर्वाचित सीनेटर अब्दुल अल-सैयद।

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अब्दुल अल-सैयद ने अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीतकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वे अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम सदस्य बन गए हैं। 3 नवंबर को मिशिगन में आयोजित हुए मध्यावधि चुनावों में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार माइक रोजर्स को शिकस्त दी। अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से इसे एक बड़ा और ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।

भारत और कर्नाटक के भटकल से गहरा नाता

अब्दुल अल-सैयद की इस चुनावी सफलता के साथ ही भारत से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और खास पहलू भी सामने आया है। अब्दुल अल-सैयद का भारत के कर्नाटक राज्य के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित एक तटीय शहर भटकल से गहरा पारिवारिक संबंध है।

यह खास रिश्ता उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू के जरिए है। डॉ. सारा पेशे से एक साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) हैं। हालाँकि उनका जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के मिशिगन में ही हुआ है, लेकिन उनका पारिवारिक मूल और जड़ें कर्नाटक के भटकल शहर से जुड़ी हुई हैं।


कर्नाटक से जुड़ा डॉ. सारा का राजनीतिक और पारिवारिक इतिहास

डॉ. सारा जुकाकू का संबंध 'नवायत मुस्लिम' समुदाय से है, जिसकी ऐतिहासिक जड़ें भारत के तटीय क्षेत्रों और पश्चिमी एशिया से जुड़ी मानी जाती हैं। उनका परिवार कर्नाटक में एक मजबूत राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि रखता है।

डॉ. सारा के दादा जे.एच. शम्सुद्दीन जुकाकू एक नामचीन वकील और राजनेता थे। वे साल 1946 में बॉम्बे लेजिस्लेटिव असेंबली के सदस्य चुने गए थे। इसके बाद वे मैसूर राज्य सरकार में उपमंत्री (डिप्टी मिनिस्टर) बने और उन्होंने वित्त तथा बिजली जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियाँ संभालीं। भटकल में उनके द्वारा किए गए नागरिक सुधारों और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए दान को आज भी याद किया जाता है। 52 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद उनके दस बच्चे देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों में बस गए।

डॉ. सारा के पिता डॉ. जुकाकू एस. तैयब ने 1970 के दशक में बैंगलोर मेडिकल कॉलेज से अपनी मेडिकल शिक्षा पूरी की थी। मिडिल ईस्ट में कार्य करने के बाद वे मिशिगन चले गए, जहाँ उन्होंने किडनी रोग विशेषज्ञ (नेफ्रोलॉजिस्ट) के रूप में अपनी सेवाएँ शुरू कीं। अमेरिका में बसने के बाद भी इस परिवार ने भारत से अपना संपर्क बनाए रखा और वे अक्सर बेंगलुरु व भटकल आते-जाते रहे हैं।

'अरब से ज्यादा भारतीय हो चुका हूँ'

दक्षिण भारतीय परिवार में शादी होने के बाद अब्दुल अल-सैयद खुद को भारत के बेहद करीब पाते हैं। वे लगभग दो दशकों से इस दक्षिण भारतीय परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं। वे अक्सर बातचीत के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में कहते हैं कि इतने सालों तक भारतीय परिवार में घुलने-मिलने के बाद अब वे शायद अरब से ज्यादा भारतीय बन चुके हैं।

विश्वविद्यालय से शुरू हुई प्रेम कहानी और शादी

अब्दुल अल-सैयद और डॉ. सारा जुकाकू की पहली मुलाकात 'यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन' में पढ़ाई के दौरान हुई थी। उस समय दोनों कॉलेज के 'मुस्लिम स्टूडेंट्स एसोसिएशन' से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।

समय के साथ दोनों का रिश्ता गहरा होता गया और साल 2006 में दोनों ने विवाह कर लिया। वर्तमान में उनकी दो बेटियाँ हैं, जिनका नाम एमाली और सेरीन है। डॉ. सारा ने अपनी उच्च शिक्षा ऑक्सफोर्ड से पूरी की और फिर 2015 में कोलंबिया से एमडी (MD) की डिग्री हासिल की।