ठाणे में रिंग मेट्रो परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान काटे गए पेड़। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने बिना कानूनी वृक्ष प्राधिकरण गठित किए पेड़ काटने की अनुमति देने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

ठाणे में अंतर्गत रिंग मेट्रो परियोजना के लिए होने वाली वृक्ष कटाई का मामला अब मुंबई हाईकोर्ट पहुंच गया है। ठाणे महानगरपालिका पर कानूनी रूप से वृक्ष प्राधिकरण का गठन किए बिना ही पेड़ों की कटाई की अनुमति देने का आरोप लगा है। इस मामले में पर्यावरण कार्यकर्ता और येऊर एनवायरनमेंटल सोसाइटी के संस्थापक-अध्यक्ष रोहित मनोहर जोशी ने जनहित याचिका दायर कर हजारों पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की प्रक्रिया को चुनौती दी है।

याचिका में ठाणे महानगरपालिका आयुक्त द्वारा 17 जून 2026 को मंजूर किए गए प्रस्ताव और 24 अगस्त को जारी पेड़ों की कटाई एवं पुनर्रोपण की अनुमति को चुनौती दी गई है। याचिका के अनुसार, रायलादेवी तालाब से बालकुम तक मेट्रो मार्ग पर 519 पेड़ों की कटाई और 2,693 पेड़ों के पुनर्रोपण को मंजूरी दी गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों से ठाणे में 4,600 से अधिक पेड़ों के संबंध में भी इसी तरह की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

याचिकाकर्ताओं ने वृक्ष प्राधिकरण का तत्काल गठन करने, संबंधित अनुमतियों को रद्द करने और स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक पेड़ों की कटाई तथा पुनर्रोपण पर रोक लगाने की मांग की है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि मेट्रो परियोजना के विकास कार्यों के साथ शहर के पर्यावरण का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में ठाणे रिंग मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की प्रक्रिया और वृक्ष प्राधिकरण के कानूनी गठन का मुद्दा अब न्यायिक चुनौती के केंद्र में है।

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