महाराष्ट्र के ठाणे जिले में कम बारिश और सूखे जैसे हालात के कारण खेत में लगी नाचणी (रागी) की फसल प्रभावित हुई है।

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में बारिश के समय से पहले थमने से धान की खेती के साथ नाचणी और वरी की फसलें भी संकट में आ गई हैं। खरीफ सीजन की फसलों को संभावित नुकसान को देखते हुए विधायक किसन कथोरे ने ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों में सूखा घोषित करने और किसानों को नुकसान के अनुपात में आर्थिक सहायता देने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को ज्ञापन सौंपा है।

ठाणे जिले के किसान मुख्य रूप से खरीफ सीजन में धान की खेती करते हैं। इसके अलावा नाचणी और वरी की फसलें भी बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। इस वर्ष बारिश का आगमन लगभग एक महीने की देरी से होने के कारण बुवाई और रोपाई की पूरी योजना प्रभावित हुई। अब बारिश में लंबे अंतराल के चलते फसलों पर संकट गहरा गया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, जिले में धान की कुल खेती के आधे क्षेत्र में फसल को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों में सूखे का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बारिश में आए लंबे अंतराल से धान सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका तेज हो गई है। ठाणे जिले में सूखा घोषित कर किसानों को राहत देने की मांग विधायक किसन कथोरे ने उठाई है।

वहीं, रायगढ़ जिले में अलीबाग, मुरुड, रोहा, पेण और सुधागढ़-पाली सहित पांच तालुकों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल करने की मांग शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पक्ष ने सरकार से की है। दूसरी ओर, पालघर जिले के मोखाडा, जव्हार और तलासरी इन तीन तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। ऐसे में प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने, फसल नुकसान का पंचनामा कराने और सूखे से संबंधित रियायतें उपलब्ध कराने को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

बारिश की कमी का असर केवल धान की खेती तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। जिले में लगभग 50 से 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान और सब्जियों की खेती की जाती है। इस वर्ष मिट्टी में नमी कम होने के साथ कुओं और बोरवेल में पानी का स्तर भी घट गया है। इससे आगामी समय में दलहन और सब्जियों की खेती प्रभावित होने की आशंका है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए विधायक किसन कथोरे ने ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर सूखा घोषित करने और नुकसान झेल रहे किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। बताया गया है कि उनके ज्ञापन के बाद जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का पंचनामा करने के आदेश भी दिए गए हैं। अब प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन, किसानों को राहत और सूखे से जुड़ी रियायतों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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