WhatsApp यूजरनेम फीचर पर स्पष्टीकरण: सुरक्षा उपायों की दी जानकारी

भारत सरकार की चिंताओं के बीच WhatsApp ने आगामी यूजरनेम फीचर को लेकर सुरक्षा नियमों और निजता सुरक्षा के उपायों का विस्तृत ब्यौरा जारी किया है।

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Update: 2026-07-02 10:46 GMT

तस्वीर में WhatsApp का आधिकारिक लोगो और ब्रांडिंग दिखाई दे रही है।

भारत सरकार की कड़ी जांच और प्रतिरूपण, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी तथा "डिजिटल अरेस्ट" जैसे साइबर अपराधों की आशंकाओं के बीच Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp ने अपने आगामी यूजरनेम फीचर को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। कंपनी ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) के माध्यम से बताया कि यह फीचर पूरी तरह वैकल्पिक होगा और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।

WhatsApp ने स्पष्ट किया कि किसी भी उपयोगकर्ता के लिए यूजरनेम बनाना अनिवार्य नहीं होगा। सभी मौजूदा उपयोगकर्ता अपने वर्तमान फोन नंबर आधारित अकाउंट के साथ पहले की तरह प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेंगे। कंपनी ने यह भी कहा कि Instagram या Telegram की तरह WhatsApp पर यूजरनेम सार्वजनिक रूप से खोजे नहीं जा सकेंगे, जिससे अनजान लोगों द्वारा संपर्क किए जाने की संभावना कम होगी।

कंपनी के अनुसार, जिस प्रकार WhatsApp पर किसी फोन नंबर को खोजकर संपर्क नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार किसी यूजरनेम को भी खोजा नहीं जा सकेगा। यदि कोई उपयोगकर्ता अतिरिक्त सुरक्षा चाहता है तो वह "यूजरनेम की" फीचर सक्रिय कर सकता है। इस सुविधा के तहत किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसके यूजरनेम के साथ उसकी विशिष्ट सुरक्षा की भी आवश्यक होगी। उपयोगकर्ता किसी भी समय अपनी यूजरनेम की को रीसेट भी कर सकेगा।

WhatsApp ने बताया कि जब किसी ऐसे व्यक्ति का संदेश प्राप्त होगा जिससे पहले कभी बातचीत नहीं हुई है, तब उपयोगकर्ता को अतिरिक्त सुरक्षा संबंधी जानकारी दिखाई जाएगी। इसमें संदेश भेजने वाले का देश, यह जानकारी कि संबंधित अकाउंट नया बनाया गया है या नहीं तथा क्या दोनों किसी साझा ग्रुप में शामिल हैं, जैसी जानकारियां प्रदर्शित होंगी। इसके अलावा अज्ञात उपयोगकर्ताओं को ब्लॉक करने और रिपोर्ट करने जैसी मौजूदा सुरक्षा सुविधाएं पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी।

प्रतिरूपण की आशंकाओं पर कंपनी ने कहा कि प्रसिद्ध सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों और Meta Verified खातों से जुड़े प्रमुख यूजरनेम तथा उनके समान दिखने वाले वैरिएशन सुरक्षित रखे जाएंगे। ऐसे नाम केवल उनके वास्तविक और वैध मालिक ही प्राप्त कर सकेंगे। WhatsApp ने उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि कोई भी व्यक्ति लोकप्रिय या चर्चित यूजरनेम पहले से आरक्षित कर सकता है। कंपनी ने कहा कि केवल वास्तविक और अधिकृत अकाउंट धारकों को ही ऐसे संरक्षित नाम दिए जाएंगे।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब भारत सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस फीचर को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। सरकार ने कंपनी को निर्देश दिया है कि जब तक परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में इस फीचर को लागू न किया जाए। साथ ही तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा गया है। सरकार को आशंका है कि यह फीचर प्रतिरूपण, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और "डिजिटल अरेस्ट" जैसे साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है।

WhatsApp ने बताया कि वैश्विक स्तर पर इस फीचर को वर्ष के अंत तक चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। कंपनी ने कहा कि लॉन्च से पहले यूजरनेम आरक्षण की सुविधा इसलिए शुरू की गई है क्योंकि उपयोगकर्ताओं की अपने पसंदीदा यूजरनेम को लेकर मजबूत प्राथमिकताएं हो सकती हैं और कंपनी वैश्विक रोलआउट से पहले लोगों की प्रतिक्रिया भी जानना चाहती है। साथ ही WhatsApp ने भरोसा दिलाया कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग शुरू होने के बाद भी वह उपयोगकर्ताओं की रिपोर्ट और ब्लॉक किए गए खातों की लगातार निगरानी करेगा ताकि धोखाधड़ी और प्रतिरूपण करने वाले खातों के खिलाफ समय पर कार्रवाई की जा सके।

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