अब एक क्लिक पर दूर होगी हर समस्या; 'किसान सारथी' से बदला भारतीय कृषि का चेहरा

देश के करीब 3 करोड़ अन्नदाताओं को एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़कर 13 क्षेत्रीय भाषाओं में मौसम, मंडी भाव और फसल अनुकूल लाइव परामर्श प्रदान किया जा रहा है।

Update: 2026-06-29 13:50 GMT

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कृषि मंत्रालय द्वारा संचालित देश के सबसे बड़े कृषि-परामर्श पोर्टल 'किसान सारथी' का आधिकारिक लोगो।

Integrated Digital Agriculture Platform : पारंपरिक खेती की रूढ़ियों को तोड़कर भारतीय कृषि परिदृश्य को पूरी तरह से आधुनिक और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा विप्लव खड़ा हो गया है। देश के करोड़ों अन्नदाताओं को सशक्त करने और उन तक समय पर, प्रामाणिक व बहुभाषी कृषि परामर्श पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया 'किसान सारथी' आज भारत का सबसे बड़ा एकीकृत डिजिटल कृषि-परामर्श मंच बनकर उभरा है। जुलाई 2021 में बोया गया यह डिजिटल बीज आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है, जिसने प्रयोगशालाओं में होने वाले उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधानों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचा दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की यह संयुक्त और दूरगामी पहल भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के कुशल क्रियान्वयन के दम पर देश के ग्रामीण अंचल की तस्वीर को पूरी तरह बदल रही है।

इस क्रांतिकारी एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म की आंतरिक कार्यप्रणाली और उसकी व्यापकता दलाल स्ट्रीट से लेकर सुदूर गांवों तक चर्चा का विषय बनी हुई है। 'किसान सारथी' की तकनीकी रीढ़ इसका 'इंटरैक्टिव इन्फॉर्मेशन डिसेमिनेशन सिस्टम' (IIDS) है, जो किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, टेक्स्ट, इमेज और चैट के माध्यम से सीधा दो-तरफा संवाद स्थापित करता है। यह प्रणाली बेहद अनूठे ‘नो योर फार्मर’ (KYF) यानी 'अपने किसान को जानो' दृष्टिकोण पर काम करती है, जिसके तहत विशेषज्ञ किसान की पिछली बातचीत, उसके खेत के भौगोलिक स्थान और फसल संबंधी पुराने इतिहास को देखकर सटीक सलाह देते हैं। वर्तमान में यह मंच राष्ट्रीय स्तर पर 730 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), 100 से अधिक आईसीएआर (ICAR) संस्थानों और 65 से अधिक प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालयों को एक ही सूत्र में पिरोता है। देश की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए इसमें 13 क्षेत्रीय भाषाओं में लाइव संवाद, कॉन्फ्रेंसिंग और टोल-फ्री नंबर जैसी विशिष्ट सुविधाएं दी गई हैं, जिससे भाषाई बाधाएं हमेशा के लिए समाप्त हो गई हैं।

विधिक, नीतिगत और आधिकारिक आंकड़ों के तराजू पर तौलें तो 25 जून 2026 तक इस डिजिटल पोर्टल ने सफलता के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में इस सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म पर 610 महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं लाइव उपलब्ध हैं, जिनमें अकेले केंद्र सरकार की 102 कल्याणकारी योजनाएं शामिल हैं। यह मंच किसानों को सीधे पीएम-किसान जैसी बड़ी योजनाओं की वास्तविक स्थिति और पात्रता की विधिक जानकारी प्रदान करता है। अब तक देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 768 जिलों तथा 6.63 लाख गांवों तक अपनी पहुंच दर्ज कराते हुए इस मंच पर 2.95 करोड़ से अधिक किसानों का पंजीकरण हो चुका है। ग्रामीण वीमेन एम्पावरमेंट को मजबूती देते हुए इस सूची में 56.16 लाख से अधिक महिला लाभार्थी भी शामिल हैं। पंजीकरण के माध्यमों में 2.89 करोड़ किसान अकेले कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से जुड़े हैं, जबकि शेष लाभार्थी किसान कॉल सेंटर, मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए डिजिटल मुख्यधारा का हिस्सा बने हैं। अनाज, दलहन, बागवानी और फसलों के अलावा यह मंच पशुपालन व मत्स्य पालन की लाइव सलाह भी दे रहा है, जिसके तहत अब तक 19.21 लाख से अधिक जटिल प्रश्नों का ऑन-स्पॉट समाधान किया जा चुका है।

प्रशासनिक और रणनीतिक स्तर पर यह महा-मंच केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि अनुसंधान संस्थानों, विस्तार एजेंसियों और नीति-निर्माताओं के लिए भी एक अमूल्य विधिक उपकरण साबित हो रहा है। इसके जरिए मिल रहे रीयल-टाइम फील्ड डेटा के आधार पर सरकार को भविष्य की कृषि नीतियों और आपदा प्रबंधन योजनाओं को तैयार करने में अभूतपूर्व सहायता मिल रही है। मौसम विज्ञान विभाग और माइस्कीम जैसे मंचों के एकीकरण ने दलालों और बिचौलियों की भूमिका को समाप्त कर सूचना के लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा दिया है।

'किसान सारथी' के माध्यम से ग्रामीण भारत में आया यह तकनीकी बदलाव इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि आने वाले समय में भारतीय कृषि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रही है। इस डिजिटल विस्तार प्रणाली ने न केवल किसानों के निर्णय लेने की क्षमता में गुणात्मक सुधार किया है, बल्कि इनपुट लागत को घटाकर उनकी आय को दोगुना करने के संकल्प को भी व्यावहारिक धरातल पर उतारा है। जैसे-जैसे देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर हो रहा है, 'किसान सारथी' जैसी मजबूत डिजिटल कड़ियां देश के कृषि क्षेत्र को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और आत्मनिर्भर बनाकर भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई और सुरक्षित दिशा प्रदान करती रहेंगी।

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