स्क्रीन टाइम घटाकर असली जिंदगी और मानसिक शांति से जुड़ने के लिए डिजिटल डिटॉक्स अपनाते युवा।

नई दिल्ली। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की दुनिया में घंटों बिताने वाली जेन-जी अब अपनी डिजिटल आदतों में बदलाव की कोशिश कर रही है। लगातार सोशल मीडिया चलाने और बार-बार फोन चेक करने की आदत से परेशान युवा अब डिजिटल दुनिया से कुछ दूरी बना रहे हैं। इसके लिए कोई विशेष ऐप्स की मदद ले रहा है, तो कोई स्मार्टफोन छोड़कर सामान्य फोन अपना रहा है। युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे इस बदलाव को डिजिटल डिटॉक्स कहा जा रहा है।

दरअसल, आज की जेन-जी का काफी समय फोन और सोशल मीडिया पर गुजरता है। सुबह से शाम और शाम से रात कब हो जाती है, इसका पता तक नहीं चलता। स्मार्टफोन उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि, अब कुछ युवा इस आदत को बदलने और स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।

डिजिटल डिटॉक्स का क्या है मतलब?

डिजिटल डिटॉक्स का अर्थ कुछ समय के लिए स्मार्टफोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाना या इनके इस्तेमाल को कम करना है। इसका मतलब यह नहीं है कि फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया जाए। इसका उद्देश्य जरूरत के मुताबिक फोन चलाना और बिना किसी वजह के बार-बार उसे चेक करने की आदत को कम करना है।

ऐप्स की मदद से फोन का इस्तेमाल घटा रहे युवा

द गार्जियन की 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 वर्षीय नेलिसा मौकौंडी ने फोन का इस्तेमाल कम करने के लिए ओपल ऐप डाउनलोड किया। यह ऐप इंस्टाग्राम और ध्यान भटकाने वाले दूसरे ऐप्स को ब्लॉक कर देता है। इन ऐप्स को दोबारा खोलने के लिए यूजर को गणित के सवाल हल करने पड़ते हैं। इस तरह फोन पर अनावश्यक समय बिताने की आदत को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।

स्मार्टफोन छोड़कर सामान्य फोन अपना रहे युवा

डिजिटल डिटॉक्स के लिए कुछ युवा स्मार्टफोन की जगह ऐसे सामान्य फोन अपना रहे हैं, जिनमें सोशल मीडिया और ज्यादा इस्तेमाल होने वाले दूसरे ऐप्स उपलब्ध नहीं होते। रिपोर्ट में 23 वर्षीय केंडल श्रोए का जिक्र किया गया है, जिन्होंने लाइट फोन इस्तेमाल करना शुरू किया। इस फोन में कॉल और मैसेज जैसी जरूरी सुविधाएं ही मिलती हैं।

वहीं, 19 वर्षीय श्रेया नल्लामोथु ने ब्रिक नाम का एक डिवाइस बनाया है। इसकी मदद से स्मार्टफोन में अपनी पसंद के ऐप्स को ब्लॉक किया जा सकता है। उन्होंने इस डिवाइस को तैयार करने के लिए केवल 8 डॉलर के NFC टैग का इस्तेमाल किया।

ऑनलाइन दोस्तों के बजाय आमने-सामने मुलाकात को प्राथमिकता

डिजिटल दुनिया से दूरी बनाने की कोशिश में कुछ युवा सोशल मीडिया पर घंटों बिताने के बजाय दोस्तों से वास्तविक जिंदगी में मिलना पसंद कर रहे हैं। इसके लिए पाय (पीपल आय इंजॉय) जैसे ऐप्स भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ये ऐप्स आसपास आयोजित होने वाले कॉन्सर्ट, इवेंट्स और अन्य गतिविधियों की जानकारी देते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस ऐप के यूजर्स की संख्या जुलाई में 1.2 लाख से बढ़कर अगस्त में 3 लाख हो गई। यह बदलाव युवाओं के बीच ऑनलाइन गतिविधियों के साथ-साथ वास्तविक दुनिया में सामाजिक मेलजोल की ओर बढ़ती दिलचस्पी को भी दर्शाता है।

सोशल मीडिया नहीं, उसकी लत से दूरी बना रही जेन-जी

26 वर्षीय हान चोई ने सोशल मीडिया ऐप्स डिलीट कर दिए, ताकि वे वर्कआउट कर सकें और दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिता सकें। इससे जेन-जी की बदलती डिजिटल आदतों का एक और पहलू सामने आता है। युवा तकनीक का इस्तेमाल पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहते, बल्कि यह तय करना चाहते हैं कि उनका कितना समय स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर खर्च हो।

इस तरह डिजिटल डिटॉक्स के लिए ऐप्स ब्लॉक करने, सामान्य फोन अपनाने, NFC आधारित डिवाइस इस्तेमाल करने और दोस्तों से आमने-सामने मिलने जैसे अलग-अलग तरीके सामने आ रहे हैं। जेन-जी के बीच यह रुझान स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को अपनी जरूरत के अनुसार सीमित करने की कोशिश के रूप में उभर रहा है।