ज्योतिष में AI का इस्तेमाल: जानिए कैसे बदल रहा भविष्य जानने का तरीका
AstroLive के COO दीपक साल्वी ने बताया कि AI और ऐप्स वैदिक ज्योतिष की गणनाओं को सटीक व सुलभ बना रहे हैं, लेकिन अंतिम सलाह मानवीय अनुभव पर निर्भर है।
तस्वीर में बाएं AstroLive के सह-संस्थापक दीपक साल्वी और दाएं डिजिटल ज्योतिष तथा राशि चक्र का प्रतीक दिखाई दे रहा है।
स्मार्टफोन, मोबाइल ऐप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने ज्योतिष को समझने और उससे जुड़ी जानकारी हासिल करने का तरीका बदल दिया है। अब लोग ग्रहों की चाल, सितारों की स्थिति और भविष्य से जुड़े सवालों के जवाब जानने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि AI से मिलने वाली ज्योतिषीय जानकारी कितनी सटीक है और क्या तकनीक पारंपरिक ज्योतिष की जगह ले सकती है?
डिजिटल ज्योतिष और सोशल प्लेटफॉर्म AstroLive के सीओओ और सह-संस्थापक दीपक साल्वी ने इस विषय पर अपनी राय रखी है। उनके अनुसार, सदियों पुराने वैदिक ज्योतिष और आधुनिक तकनीक का मेल ज्योतिषीय ज्ञान को अधिक व्यक्तिगत, डेटा आधारित, व्यवस्थित और सुलभ बनाने में मदद कर रहा है।
दीपक साल्वी ने स्पष्ट किया कि तकनीक ज्योतिष विद्या की जगह नहीं ले रही है, बल्कि इसे बेहतर तरीके से लोगों तक पहुंचाने में सहायक बन रही है। उनका कहना है, 'ज्योतिष की विद्या को टेक्नोलॉजी द्वारा रिप्लेस नहीं किया जा रहा है। बल्कि AI उस ज्ञान को और ज्यादा पर्सनलाइज्ड, ज्यादा डेटा ड्रिवन, व्यवस्थित और सुलभ बनाने में मदद कर रहा है।'
ज्योतिष को आसान और व्यक्तिगत बना रहा AI
दीपक साल्वी के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रगति से खगोल विज्ञान से जुड़ा विशाल और जटिल डेटा कम समय में समझना आसान हुआ है। इसके साथ ही, उपलब्ध जानकारी को प्रत्येक व्यक्ति की विशेषताओं और जरूरतों के अनुरूप प्रस्तुत किया जा सकता है, जिससे उसे अपने लिए उपयोगी जानकारी हासिल करने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि AstroLive में पारंपरिक ज्योतिष और तकनीक को एक साथ लाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसका उद्देश्य वर्तमान समय में ज्योतिष में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अधिक व्यक्तिगत अनुभव तैयार करना है।
सितारे वही, लेकिन समझने का तरीका बदला
दीपक साल्वी का कहना है कि ग्रहों की स्थिति में बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन उन्हें समझने का तरीका जरूर बदल गया है। उनके अनुसार, तकनीक के इस्तेमाल से ज्योतिष अपनी पारंपरिक पहचान खोने के बजाय अधिक बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, 'ग्रहों की स्थिति नहीं बदली है, लेकिन हमारा उन्हें समझने का तरीका जरूर बदल गया है। इसलिए मेरा मानना ये है कि एस्ट्रोलॉजी पहले से कम पारंपरिक नहीं हो रही, बल्कि पहले से ज्यादा इंटेलिजेंट बन रही है।'
दीपक के मुताबिक, पहले जिन गणनाओं को पूरा करने में घंटों लगते थे, अब वही काम कुछ सेकंड में किया जा सकता है। उनके अनुसार, तकनीक लोगों को अपनी परंपरा से दूर नहीं ले जा रही, बल्कि उसे अधिक गहराई से समझने में मदद कर रही है।
कुंडली और ग्रहों की गणना में AI की भूमिका
दीपक साल्वी ने ज्योतिषीय गणनाओं में AI की भूमिका को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ज्योतिषियों का काम आसान बनाता है और कुंडली तैयार करने के साथ ग्रहों की गणना जैसे कार्य कुछ ही सेकंड में पूरे करने में मदद करता है।
हालांकि, उन्होंने भविष्यवाणी और सलाह देने में ज्योतिषियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। दीपक के शब्दों में, ‘AI ज्योतिषियों का काम आसान बनाता है, जैसे कुंडली और ग्रहों की गणना सेकंड्स में तैयार कर देना। लेकिन भविष्यवाणी और सलाह हमेशा ज्योतिष ही देते हैं, क्योंकि अनुभव और समझ का कोई विकल्प नहीं है।’
AI और मोबाइल ऐप्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ज्योतिष को लेकर यह दृष्टिकोण पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच बदलते संबंध को सामने रखता है। इस चर्चा का मुख्य बिंदु यह है कि तकनीक गणनाओं और जानकारी को अधिक सुलभ बना सकती है, जबकि ज्योतिषीय भविष्यवाणी और सलाह में मानवीय अनुभव की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।