WPL 2027 Mini Auction: सोफी मोलिन्यू सबसे महंगी, यूपी वॉरियर्स ने खरीदे सबसे ज्यादा खिलाड़ी
कोच्चि में हुए मिनी ऑक्शन में 25 खिलाड़ियों पर लगी बोली, 6.25 करोड़ रुपये हुए खर्च; यूपी वॉरियर्स ने सबसे ज्यादा 8 खिलाड़ी खरीदे।
कोच्चि में WPL 2027 मिनी ऑक्शन आयोजित हुआ, जहां पांचों टीमों ने 25 खिलाड़ियों को खरीदा।
वुमन्स प्रीमियर लीग (WPL) 2027 के मिनी ऑक्शन में पांचों फ्रेंचाइजी ने आगामी सीजन के लिए अपनी टीमों को मजबूत करने के उद्देश्य से खिलाड़ियों पर दांव लगाया। कोच्चि में आयोजित नीलामी में 27 खाली स्थानों में से 25 भर गए और टीमों ने कुल 6.25 करोड़ रुपये खर्च किए। ऑस्ट्रेलिया की सोफी मोलिन्यू सबसे महंगी खिलाड़ी रहीं, जिन्हें यूपी वॉरियर्स ने 1.10 करोड़ रुपये में खरीदा। वहीं, दिल्ली कैपिटल्स ने किरण नवगिरे को 75 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा। नीलामी के बाद तीन टीमों के पास 18-18 खिलाड़ी हैं, जबकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स की टीमों में 17-17 खिलाड़ी हैं।
150 खिलाड़ियों ने कराया था पंजीकरण
मिनी ऑक्शन के लिए कुल 150 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 72 खिलाड़ियों के नाम नीलामी में आए, जबकि 47 खिलाड़ी नहीं बिक सके। इस तरह कुल 25 खिलाड़ियों को खरीदा गया। इनमें से 22 खिलाड़ी अपनी निर्धारित बेस प्राइस पर बिके, जबकि केवल तीन खिलाड़ियों को बेस प्राइस से अधिक रकम मिली। नीलामी में ऑलराउंडर्स की सबसे ज्यादा मांग रही। खरीदे गए 25 खिलाड़ियों में 13 ऑलराउंडर्स शामिल थीं। इसके अलावा फ्रेंचाइजी ने सात बल्लेबाज, तीन विशेषज्ञ गेंदबाज और दो विकेटकीपर खरीदे।
सोफी मोलिन्यू सबसे महंगी खिलाड़ी
ऑस्ट्रेलिया की सोफी मोलिन्यू को यूपी वॉरियर्स ने 1.10 करोड़ रुपये में खरीदा। उनकी बेस प्राइस 50 लाख रुपये थी। दिल्ली कैपिटल्स ने किरण नवगिरे को 75 लाख रुपये में खरीदा, जबकि उनकी बेस प्राइस 40 लाख रुपये थी। मुंबई इंडियंस ने श्वेता सहरावत को 20 लाख रुपये में टीम में शामिल किया। उनकी बेस प्राइस 10 लाख रुपये थी। इन तीनों खिलाड़ियों पर उनकी निर्धारित बेस प्राइस से अधिक बोली लगी।
यूपी वॉरियर्स ने सबसे ज्यादा खर्च किए
यूपी वॉरियर्स नीलामी में सबसे सक्रिय फ्रेंचाइजी रही। टीम के पास नीलामी से पहले 3.75 करोड़ रुपये थे। उसने आठ खिलाड़ियों को खरीदने पर कुल 2.60 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके बावजूद टीम के पर्स में 1.15 करोड़ रुपये शेष रहे। दूसरी ओर, मुंबई इंडियंस ने छह खिलाड़ियों को खरीदने पर केवल 70 लाख रुपये खर्च किए। नीलामी के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स के पास 17-17 खिलाड़ी हैं, जबकि अन्य तीन फ्रेंचाइजी ने 18 खिलाड़ियों का अपना स्क्वॉड पूरा कर लिया।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु: मजबूत कोर को मिला सहारा
डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पास नीलामी से पहले ही मजबूत टीम थी। स्मृति मंधाना, ऋचा घोष, नादिन डी क्लर्क, श्रेयंका पाटिल, राधा यादव और जॉर्जिया वॉल जैसी खिलाड़ी टीम का हिस्सा थीं। एलिस पेरी की वापसी से भी टीम को मजबूती मिली।
आरसीबी ने जेस जोनासन को 40 लाख रुपये, क्लो ट्रायन को 30 लाख रुपये, तेजल हसबनिस को 30 लाख रुपये और वृंदा दिनेश को 10 लाख रुपये में खरीदा। जेस जोनासन और क्लो ट्रायन मध्यक्रम में ताकत बढ़ाने के साथ चयन के अधिक विकल्प देंगी। तेजल हसबनिस भारतीय बल्लेबाजी क्रम को मजबूती दे सकती हैं, जबकि वृंदा दिनेश से भी टीम को अतिरिक्त गहराई मिलेगी। हालांकि, इन खरीदारी के बाद भी आरसीबी के स्क्वॉड में 17 खिलाड़ी ही हैं।
दिल्ली कैपिटल्स: विकेटकीपर की जरूरत के बीच किरण नवगिरे पर दांव
दिल्ली कैपिटल्स के सामने नीलामी से पहले विकेटकीपर का विकल्प मजबूत करने की चुनौती थी। टीम में ममता मडिवाला ही इस भूमिका के लिए उपलब्ध थीं। लिजेल ली के जाने के बाद उम्मीद थी कि फ्रेंचाइजी ऐसा विकेटकीपर-बल्लेबाज खरीदेगी, जो बल्लेबाजी में भी योगदान दे सके। हालांकि, टीम ने इस जरूरत को प्राथमिकता नहीं दी।
दिल्ली कैपिटल्स ने किरण नवगिरे को 75 लाख रुपये, उमा काशवी को 10 लाख रुपये, कर्स्टी गॉर्डन को 10 लाख रुपये और नाजमा खान को 10 लाख रुपये में खरीदा। किरण नवगिरे की खरीदारी से बल्लेबाजी को मजबूती देने की कोशिश की गई, लेकिन विकेटकीपर की जरूरत पूरी नहीं होने से टूर्नामेंट के दौरान टीम के संयोजन पर असर पड़ सकता है।
मुंबई इंडियंस: बड़े नामों के बजाय टीम की गहराई पर जोर
मुंबई इंडियंस के पास नीलामी से पहले मजबूत स्क्वॉड था। फ्रेंचाइजी ने किसी एक या दो बड़े नामों पर भारी बोली लगाने के बजाय बेंच स्ट्रेंथ मजबूत करने पर ध्यान दिया। टीम ने श्वेता सहरावत, दिशा कसाट, लतिका इनामदार, भारती रावल, सानिका चालके और अक्षिता भगत को खरीदा। इन खिलाड़ियों के जुड़ने से टीम को विभिन्न विभागों में अतिरिक्त विकल्प मिले हैं।
हालांकि, कमलिनी को रिलीज करने के बाद विकेटकीपिंग के विकल्पों में फिरदौस और लतिका इनामदार के नाम हैं। इस विभाग में अनुभव की कमी मुंबई इंडियंस के लिए चुनौती बन सकती है।
गुजरात जायंट्स: तीन खिलाड़ियों की खरीदारी, प्लेइंग इलेवन पर नजर
गुजरात जायंट्स नीलामी में अपेक्षाकृत पूरी टीम के साथ उतरी थी और उसके पास केवल तीन खाली स्थान थे। फ्रेंचाइजी ने कमलिनी को 40 लाख रुपये, ऑर्ला प्रेंडरगास्ट को 30 लाख रुपये और समायरा राघव को 10 लाख रुपये में खरीदा।
इन खरीदारी के बाद टीम के सामने प्लेइंग इलेवन का संतुलन तय करने की चुनौती होगी। कमलिनी शीर्ष क्रम की विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, लेकिन बेथ मूनी पहले से यह भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में दोनों खिलाड़ियों को टीम में किस तरह समायोजित किया जाएगा, यह आगामी सीजन में अहम रहेगा। ऑर्ला प्रेंडरगास्ट के शामिल होने से भी टीम के अंतिम संयोजन में चयन के नए विकल्प बनेंगे।
यूपी वॉरियर्स: सोफी मोलिन्यू पर सबसे बड़ा दांव
यूपी वॉरियर्स के पास नीलामी में सबसे ज्यादा आठ स्थान भरने थे और फ्रेंचाइजी ने सभी खाली जगहों को भर दिया। टीम ने सोफी मोलिन्यू को 1.10 करोड़ रुपये, ग्रेस हैरिस को 30 लाख रुपये, स्नेह राणा को 30 लाख रुपये, सुषमा वर्मा को 30 लाख रुपये और आशा शोभना को 30 लाख रुपये में खरीदा। इसके अलावा कैथरीन ब्राइस, मनाली दक्षिणी और सहाना पवार को 10-10 लाख रुपये में टीम में शामिल किया।
सोफी मोलिन्यू को खरीदने का फैसला टीम के लिए सबसे अहम रहा। यूपी वॉरियर्स के पास पहले से सोफी एक्लेस्टोन मौजूद हैं। ऐसे में मोलिन्यू पर बड़ी रकम खर्च करने के बाद विदेशी खिलाड़ियों के चयन और अंतिम एकादश के संतुलन पर नजर रहेगी।
ग्रेस हैरिस के आने से मध्यक्रम को वह आक्रामकता मिल सकती है, जिसकी टीम को पिछले सीजन में कमी महसूस हुई थी। सुषमा वर्मा विकेटकीपिंग करने के साथ पारी की शुरुआत भी कर सकती हैं। कैथरीन ब्राइस टीम को पांच विदेशी खिलाड़ियों के साथ उतरने का विकल्प देने के अलावा प्लेइंग इलेवन में अतिरिक्त गतिशीलता जोड़ सकती हैं। स्नेह राणा और आशा शोभना के आने से गेंदबाजी विभाग में अनुभव और विविधता बढ़ेगी।
आगामी सीजन में टीम संयोजन की होगी असली परीक्षा
WPL 2027 के मिनी ऑक्शन में पांचों फ्रेंचाइजी ने अपनी जरूरतों के अनुसार अलग-अलग रणनीतियां अपनाईं। यूपी वॉरियर्स ने सबसे ज्यादा खिलाड़ियों को खरीदते हुए सभी आठ खाली स्थान भरे, जबकि मुंबई इंडियंस ने सीमित खर्च में छह खिलाड़ियों को शामिल किया। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने अपने मजबूत कोर को सहारा दिया, वहीं दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात जायंट्स के सामने टीम संयोजन से जुड़ी चुनौतियां हैं। अब नीलामी में किए गए फैसलों की असली परीक्षा आगामी सीजन में होगी, जब फ्रेंचाइजी को उपलब्ध खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाकर अंतिम एकादश तैयार करनी होगी।