सवाई माधोपुर: बाल अपराधों से बचाव के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण का अभियान
'स्ट्रेंजर डेंजर' अभियान के तहत 2200 बच्चों को 'नो, गो, टेल' का मंत्र देकर सोशल मीडिया सुरक्षा, पॉक्सो कानून और चाइल्ड हेल्पलाइन की जानकारी दी गई।
सवाई माधोपुर के जागरूकता शिविर में बच्चों को सुरक्षा नियमों की जानकारी दी गई।
सवाई माधोपुर, 1 सितम्बर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के तत्वावधान में ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे के अवसर पर सवाई माधोपुर न्याय क्षेत्र के न्यायिक अधिकारियों एवं पैनल अधिवक्ताओं ने ‘स्ट्रेंजर डेंजर- नो, गो, टेल’ यानी अजनबी से सावधान- मना करो, दूर जाओ, बताओं विषय पर जागरूकता शिविर आयोजित कर लगभग 2200 बच्चों को बाल अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक किया।
जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समीक्षा गौतम ने पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जटवाडा कलां में, विशेष न्यायाधीश पोक्सो न्यायालय संख्या-01 मीनाक्षी जैन ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मैनपुरा में, विशेष न्यायाधीश पोक्सो न्यायालय संख्या-02 प्रेमराज सिंह चन्द्रावत ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पढाना में, न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय सुन्दरलाल बंशीवाल ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आटूण कलां में, विशिष्ट न्यायाधीश अजा/अजजा (अ.नि.) प्रकरण ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुनारी में, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश डॉ. प्रियंका पारीक ने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय आलनपुर में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मयंक पालीवाल ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दुब्बी बनास में, अति. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गार्गी चौधरी ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खटुपुरा में, प्रिंसीपल मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड निधि शर्मा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बसोकलां में, सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपांजलि जादौन ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बनोटा में, सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-01 किरण प्रजापत ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय धनोली में तथा सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 अनिता रजवानियां ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ओलवाडा में जागरूकता शिविर आयोजित किए।
तालुका गंगापुर सिटी पर अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-01 अखिलेश कल्याण ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय गंगापुर सिटी में, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-02 रेशमा खान ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय महूकलां में, सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संगीता मोगा ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बूचोलाई में तथा अति. सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 मीनाक्षी चौधरी ने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय वजीरपुर में शिविर आयोजित किया। तालुका बौंली पर अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति विकास नेहरा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बौंली में, तालुका बामनवास पर अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति सुरेश कुमार सेन ने श्री देव पब्लिक स्कूल डाबर में, तालुका खण्डार पर अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति रविन्द्र कुमार कुंतल ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मेईकलां में तथा तालुका चौथ का बरवाड़ा पर अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति नेहा मौर्य ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चौथ का बरवाड़ा में जागरूकता शिविर आयोजित किया।
इसी प्रकार डिप्टी एलएडीसी वीरेन्द्र कुमार वर्मा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेलूं में, पैनल अधिवक्ता नंदकिशोर बैरवा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रामडी में, पैनल अधिवक्ता संतोष कुमार वर्मा ने प्रज्ञा एकेडमी गंगापुर सिटी में, पैनल अधिवक्ता माया जैन ने नव प्रभात पब्लिक स्कूल गंगापुर सिटी में, पैनल अधिवक्ता रामस्वरूप टटवाल ने सैनी सीनियर सैकण्डरी स्कूल गंगापुर सिटी में एवं पैनल अधिवक्ता रामसिंह मीना ने कस्तूरबा गांधी सीनियर सैकण्डरी स्कूल लिवाली में जागरूकता शिविर आयोजित किए।
शिविरों में बच्चों को अपहरण एवं शोषण से बचाव, बाल तस्करी तथा बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि किसी भी अपरिचित व्यक्ति द्वारा दिए गए प्रलोभन, लालच या बहकावे में नहीं आना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उन्हें कहीं साथ चलने, कोई वस्तु देने अथवा किसी प्रकार का लालच देने का प्रयास करे तो ऐसी स्थिति में नो, गो एवं टेल के सिद्धांत को अपनाना चाहिए। बच्चों को समझाया गया कि खतरा महसूस होने पर तुरंत खतरे को पहचानें, स्पष्ट रूप से मना करें, सुरक्षित स्थान की ओर जाएं और घटना की जानकारी किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति अथवा चाइल्ड हेल्पलाईन नंबर 1098 को दें।
शिविर के दौरान अपहरण के कारणों तथा इसके बच्चों के जीवन पर पड़ने वाले शारीरिक एवं मानसिक प्रभावों एवं स्वयं की सुरक्षा के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त बाल तस्करी, बाल श्रम, जबरन भीख मंगवाने एवं बच्चों के शोषण जैसी समस्याओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015, लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं नालसा (बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं) योजना 2024 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि कानून द्वारा बच्चों की सुरक्षा, देखभाल, संरक्षण, पुनर्वास एवं उनके सर्वोत्तम हित को विशेष महत्व दिया गया है। किसी भी बच्चे के साथ अपराध या शोषण होने की स्थिति में उसे विधिक सहायता एवं संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार है।
बच्चों को सोशल मीडिया के सुरक्षित एवं सावधानीपूर्वक उपयोग के संबंध में भी जागरूक किया गया। उन्हें समझाया गया कि सोशल मीडिया पर अपना पता, मोबाइल नंबर, पासवर्ड, स्कूल की जानकारी, निजी फोटो अथवा अन्य व्यक्तिगत जानकारी अज्ञात व्यक्तियों के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति द्वारा ऑनलाइन दोस्ती, चौट, वीडियो कॉल अथवा मिलने का दबाव बनाए जाने पर तत्काल अपने माता-पिता अथवा शिक्षक को जानकारी देनी चाहिए।
शिविरों के माध्यम से बच्चों को संदेश दिया गया कि सावधानी, जागरूकता और समय पर सूचना देना ही बाल अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। बच्चों से अपील की गई कि वे स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ अपने साथियों एवं अन्य बच्चों को भी उनकी सुरक्षा और विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करें।
फोटो कैप्शन:- 1 पीआरओ 1 एवं 2 जागरूकता शिविर में बच्चों को जागरूक करते।