राजस्थान कैबिनेट के बड़े फैसले: OBC आरक्षण, वन स्टेट-वन इलेक्शन और नई कृषि नीति को मंजूरी
राजस्थान कैबिनेट ने OBC आरक्षण, वन स्टेट-वन इलेक्शन, कृषि नीति, फूड पार्क और श्रम नियमों समेत कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी।
तस्वीर में मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान मंत्रिमंडल के सदस्य और मंत्रीगण बैठे नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद की बैठक हुई, जिसमें पंचायत राज एवं नगरीय निकाय चुनाव वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर कराने, ओबीसी आयोग की सिफारिशें स्वीकार करने, राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 और राजस्थान फूड पार्क विकास नीति-2026 को मंजूरी देने सहित श्रम, पर्यावरण, अक्षय ऊर्जा, ग्रामीण रोजगार और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
प्रेसवार्ता में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने मंत्रिमंडल के निर्णयों की जानकारी दी।
पंचायत राज एवं नगरीय निकाय चुनाव वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर कराने का निर्णय लिया गया है। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि पंचायत राज एवं स्थानीय निकाय चुनाव अलग-अलग समय पर होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है। विकास कार्यों की गति सुचारू बनाए रखने तथा धन, श्रम और समय की बचत के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नगरीय निकाय एवं पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर कराने की घोषणा वर्ष 2024-25 के बजट में की थी।
राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की अनुशंसाएं 5 अगस्त 2026 को राज्य सरकार को प्राप्त हुई थीं। मंत्रिमंडल ने इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही नगरीय निकाय एवं पंचायत राज अधिनियम में एससी, एसटी के साथ-साथ ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अनुमोदन के बाद इन वर्गों की सीटों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति, 2026 को भी मंजूरी दी गई। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि नीति का उद्देश्य राज्य में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, कृषि उपज के मूल्य संवर्धन से किसानों की आय बढ़ाना, सप्लाई चेन को मजबूत करना और प्रोसेस्ड एग्रो उत्पादों के प्रभावी विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
नीति में फल-सब्जी, मसाला, अनाज, तिलहन, दलहन, औषधीय उत्पाद, लघु वन उपज, शहद, दुग्ध एवं पशु आहार इकाइयों के साथ साइलोज और कोल्ड स्टोरेज जैसी आधारभूत ढांचा विकास परियोजनाओं को शामिल किया गया है।
श्रीअन्न यानी मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए श्रीअन्न प्रमोशन एजेंसी की स्थापना की जाएगी। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, श्रीअन्न इकाइयों तथा प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 50 लाख रुपये तक के ऋण पर 60 प्रतिशत, 50 से 100 लाख रुपये तक के ऋण पर 50 प्रतिशत तथा एक करोड़ रुपये से अधिक के ऋण पर 40 प्रतिशत की दर से अधिकतम 1 करोड़ 50 लाख रुपये तक का पूंजीगत अनुदान देय होगा। एफपीओ, टीएसपी क्षेत्रों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त 5 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान का विशेष प्रावधान किया गया है। कोल्ड स्टोरेज, साइलोज एवं निर्यात के लिए अनुदान राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति, 2024 के प्रावधानों के अनुसार देय होगा। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं रिप्स 2024 के एमएसएमई मानक पैकेज के तहत भी पूंजीगत अनुदान के लिए आवेदन कर सकेंगी।
कृषि जिन्सों के प्रसंस्करण, व्यवसाय और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान फूड पार्क विकास नीति, 2026 को भी मंजूरी दी गई है। प्रदेश में कई स्थानों पर फूड पार्कों के विकास के लिए भूमि का आवंटन किया जा चुका है। विश्वस्तरीय फूड पार्कों की स्थापना, संचालन एवं प्रबंधन के लिए नई नीति तैयार की गई है। इसके तहत राज्य के प्रत्येक जिले में क्लस्टर आधार पर चरणबद्ध रूप से फूड पार्क विकसित किए जाएंगे।
फूड पार्कों में खाद्य उत्पादों के संरक्षण, भंडारण, प्रसंस्करण एवं परिवहन के लिए एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उत्पादक समूहों एवं किसानों को मजबूत सप्लाई चेन के माध्यम से प्रसंस्करण इकाइयों और बाजारों से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
नीति में फूड पार्कों की स्थापना को भूमि स्वामित्व एवं विकास संबंधी मानदंडों के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के तहत फूड पार्क विकास के लिए एमओयू धारक विकासकर्ताओं अथवा प्रस्तावित फूड पार्क में न्यूनतम 10 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एंकर फूड प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने के इच्छुक विकासकर्ताओं को वरीयता दी जाएगी।
मजदूरी संहिता (राजस्थान) नियम, 2026 जारी करने की स्वीकृति भी दी गई। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि श्रमिक हितों की रक्षा के साथ व्यावसायिक एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के सुव्यवस्थित संचालन के लिए इन नियमों को मंजूरी दी गई है। नियमों में न्यूनतम मजदूरी एवं काम के घंटों को पारदर्शी तरीके से निर्धारित किया गया है। न्यूनतम वेतन तय करने के लिए वैज्ञानिक फॉर्मूला और कौशल आधारित वर्गीकरण अपनाया जाएगा।
महंगाई भत्ते को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़कर साल में दो बार 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को संशोधित करने का प्रावधान किया गया है। सामान्य कार्य दिवस के लिए काम के निश्चित घंटे, आराम का अंतराल और रात्रि शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।
नियमों के तहत सप्ताह में कार्य के 48 घंटे निर्धारित किए गए हैं। छह दिवसीय कार्य सप्ताह में विश्राम अंतराल सहित अधिकतम साढ़े दस घंटे प्रतिदिन कार्य अवधि होगी और सातवां दिन सवैतनिक अवकाश रहेगा। लगातार पांच घंटे कार्य के बाद आधे घंटे के विश्राम अंतराल का प्रावधान किया गया है। अवकाश के दिन काम करने पर कर्मचारी को ओवरटाइम दर पर वेतन मिलेगा। नियोक्ताओं के लिए वेतन पर्ची देना अनिवार्य किया गया है तथा वेतन से होने वाली कानूनी कटौतियों की सीमा और डिजिटल रजिस्टर के नियम भी स्पष्ट किए गए हैं।
राज्य के श्रम ढांचे को सरल और आधुनिक बनाने के लिए राजस्थान औद्योगिक संबंध नियम, 2026 को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत सभी प्रकार के श्रम अनुपालन एवं विवाद संबंधी शिकायतों को पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल पर स्थानांतरित किया जाएगा। औद्योगिक विवादों के त्वरित समाधान के लिए समय-सीमा तय की गई है और बातचीत करने वाली यूनियनों के निष्पक्ष चुनाव के लिए गुप्त मतदान प्रणाली अनिवार्य की गई है।
कार्यस्थल पर शिकायत निवारण तथा कार्य समितियों के गठन और संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। व्यापार एवं व्यवसाय को सुगम बनाने के उद्देश्य से कर्मचारियों की छंटनी और फैक्ट्री बंद करने की कानूनी प्रक्रियाओं तथा उनके फॉर्म्स को पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरणा लेते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ के तहत पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लगभग दो वर्षों में करीब 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं और इस मानसून सीजन में भी 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है। वन क्षेत्र के बाहर हरित क्षेत्र का विस्तार करने के लिए राज्य में ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी लागू करने को मंजूरी दी गई।
इस नीति से बंजर, परती भूमि, रेलवे एवं सड़कों के आसपास की भूमि तथा सिंचित भूमि क्षेत्रों में ट्री कवर बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे जैव-विविधता संरक्षण, जल-संचयन और भू-क्षरण की प्रभावी रोकथाम में सहायता मिलेगी। राजस्थान वन नीति, 2023 के लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ कार्बन अवशोषण, रोजगार सृजन तथा गैर-काष्ठ वन उत्पादों और कृषि आधारित वृक्ष उत्पादों से बाजार एवं उद्यमिता के अवसर बढ़ाने में भी यह नीति सहायक होगी।
सौर, पवन और बायोमास जैसी गैर-पारंपरिक नवीनीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए राजस्थान भू-राजस्व (नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर आधारित शक्ति संयंत्र स्थापित करने के लिये भूमि का आवंटन) नियम, 2007 में दो महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई। परियोजना विकासकर्ताओं को आवंटित भूमि में से 10 प्रतिशत भूमि वृक्षारोपण के लिए आरक्षित रखनी होगी।
सौर एवं पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिए अब प्रति मेगावाट 2 हेक्टेयर भूमि तथा हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए 2.5 हेक्टेयर भूमि आवंटित की जा सकेगी। विकास एवं पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह संशोधन राज्य सरकार की वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा की अनुपालना में किया गया है।
राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति, 2024 में भी संशोधन को मंजूरी दी गई। राज्य में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को गति देने के लिए बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फिक्स पंजीकरण शुल्क के स्थान पर क्षमता के अनुसार स्लैब प्रस्तावित किया गया है। 50 प्रतिशत या उससे अधिक क्षमता की बैटरी स्टोरेज के साथ स्थापित परियोजनाओं को पंजीकरण शुल्क में छूट का प्रावधान किया जा रहा है।
प्रसारण तंत्र पर पावर इवैक्यूएशन की अधिकतम समय-सीमा 3 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष कर दी गई है। इससे प्रसारण तंत्र का समयबद्ध और अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा। राजस्थान सौर ऊर्जा क्षमता स्थापना में देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य में अब तक 49 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं। नीति के अनुसार वर्ष 2030 तक प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन 125 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुरक्षा, आजीविका संवर्धन और विकास के लिए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना शुरू करने की स्वीकृति भी दी गई। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा ने बताया कि यह योजना विकसित भारत और विकसित राजस्थान के विजन 2047 के अनुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर, समावेशी और दीर्घकालिक स्वरूप प्रदान करेगी। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसरों के साथ जल संरक्षण, अवसंरचना निर्माण और आपदा प्रबंधन के कार्य भी करवाए जा सकेंगे।
योजना में ग्रामीण परिवारों की रोजगार सुरक्षा बढ़ाते हुए वित्तीय वर्ष में 125 दिवस के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है। डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। महिला एवं कमजोर वर्गों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया गया है।
कर्मचारियों के हित में राजस्थान सरकारी कर्मचारी बीमा नियम, 1998 में संशोधन का निर्णय लिया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। वर्तमान व्यवस्था में राज्य कर्मचारी जिस वित्तीय वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, उस वर्ष 1 अप्रैल को ही उनकी स्टेट इंश्योरेंस पॉलिसी भुगतान के लिए मैच्योर हो जाती है, जिससे कर्मचारी सेवानिवृत्ति की वास्तविक तिथि तक बीमा कवरेज से वंचित रह जाता है। इस विसंगति को दूर करते हुए अब सभी राज्य कर्मचारियों को उनकी वास्तविक सेवानिवृत्ति तिथि तक निरंतर बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाएगा।
बालोतरा जिले के पचपदरा में रिफाइनरी से प्रभावित 198 नमक की खानों को शेष लवणीय क्षेत्र में विस्थापित करने के लिए डिस्टर्बेंस चार्जेज में संशोधन किया गया है। खुदाई की लागत दरों में वृद्धि के कारण पूर्व स्वीकृत राशि 7.85 करोड़ रुपये में 25 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 9.81 करोड़ रुपये के भुगतान की स्वीकृति दी गई है। इससे नमक खानधारकों को आजीविका का साधन मिलेगा और राज्य सरकार को राजस्व लाभ होगा।
प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए दो सीमेंट प्लांट्स के लिए औद्योगिक भूमि आवंटन को मंजूरी दी गई। मैसर्स स्टार सीमेंट नॉर्थ ईस्ट लिमिटेड को जैसलमेर जिले की तहसील रामगढ़ के ग्राम जोगा एवं सोनू में करीब 254 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि आवंटित करने की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना में करीब 6 हजार 200 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसी प्रकार मैसर्स अल्ट्रा टेक सीमेंट लिमिटेड को जैसलमेर जिले के ग्राम लीला पारेवर में करीब 107 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी गई है।
प्रदेश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 922 मेगावाट की तीन सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। बीकानेर जिले की तहसील पूगल के ग्राम भानीपुरा में 22 मेगावाट की परियोजना के लिए लगभग 44 हेक्टेयर, जैसलमेर जिले की तहसील फतेहगढ़ के ग्राम रणधा में 200 मेगावाट उत्पादन क्षमता के लिए 324 हेक्टेयर और 700 मेगावाट की परियोजना के लिए जैसलमेर की उपनिवेशन तहसील नाचना के ग्राम बोडाना में 1678 हेक्टेयर भूमि सशर्त कीमतन आवंटन की स्वीकृति दी गई। ये परियोजनाएं प्रदेश को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहायक होंगी और इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ाएंगी।
मंत्रिपरिषद की बैठक में मानसून और उससे उत्पन्न परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा की गई। निर्णय लिया गया कि सभी मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान विद्युत, पेयजल, सड़क, चिकित्सा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाएगा। भारी वर्षा के कारण आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो और आवश्यक जनसेवाएं निर्बाध रूप से संचालित रहें, यह सुनिश्चित किया जाएगा।
किसानों को उर्वरक, प्रमाणित बीज सहित सभी आवश्यक कृषि आदानों की निर्बाध, समयबद्ध और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी मंत्रिपरिषद की बैठक में चर्चा हुई। प्रभारी मंत्री अपने प्रवास के दौरान जिलों में इससे संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे, ताकि किसानों को फसल उत्पादन के प्रत्येक चरण में आवश्यक संसाधन समय पर मिल सकें और कृषि गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के संचालित हो सकें।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘हर घर तिरंगा-2026’ राष्ट्रव्यापी अभियान को प्रदेश में जन आंदोलन बनाने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस वर्ष का अभियान राष्ट्र गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने को समर्पित है। राष्ट्रभक्ति के इस अभियान को प्रदेश में 9 से 17 अगस्त तक उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा।
अभियान में आमजन की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करते हुए घरों, स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर तिरंगा फहराया जाएगा। हर घर तिरंगा समारोह में वंदे मातरम का सामूहिक गायन भी किया जाएगा। प्रदेश में ब्लॉक से ग्राम पंचायत स्तर तक राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ तिरंगा यात्रा, रैली सहित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
राजस्थान सरकार के इन निर्णयों में चुनावी व्यवस्था, ओबीसी आरक्षण, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, फूड पार्क, श्रमिक कल्याण, हरित क्षेत्र, अक्षय ऊर्जा, ग्रामीण रोजगार, कर्मचारी बीमा और औद्योगिक निवेश से जुड़े प्रावधान शामिल हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासनिक एवं विकासात्मक व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।