राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने रात्रि विश्राम आदेश का किया विरोध, सुरक्षा पर उठाए सवाल
राज शाला संबलन एप के नए आदेश पर राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम ने विरोध जताया, महिला अधिकारियों की सुरक्षा और सुविधाओं पर उठे सवाल।
शिक्षा विभाग द्वारा ‘राज शाला संबलन’ एप में नया फीचर जोड़कर अधिकारियों के लिए हर महीने चार सरकारी स्कूलों में रात्रि विश्राम अनिवार्य किए जाने के आदेश का राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) ने कड़ा विरोध किया है। संगठन ने इस आदेश को पूर्णतया अव्यावहारिक, शिक्षक विरोधी और तानाशाहीपूर्ण करार दिया है।
राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा ने बताया कि सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के उद्देश्य से लिया गया यह निर्णय जमीनी परिस्थितियों से मेल नहीं खाता। आदेश के अनुसार अधिकारियों को शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक विद्यालय में रुकना होगा, लेकिन प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में रात्रि विश्राम के लिए आवश्यक न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीणा और प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री सोहन लाल गुप्ता ने कहा कि ग्रामीण विद्यालयों में शौचालय, बिजली और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में अधिकारियों के लिए विद्यालयों में रात्रि विश्राम की व्यवस्था करना व्यवहारिक रूप से कठिन है।
संगठन ने महिला शिक्षा अधिकारियों की सुरक्षा को सबसे गंभीर विषय बताया है। संघ पदाधिकारियों के अनुसार दूर-दराज के गांवों में रात के समय आवास और आवागमन की सुविधाएं पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। इसके अलावा पीईईओ पहले से ही दिनभर विद्यालयों में उपस्थित रहते हैं, ऐसे में उनसे रात में भी विद्यालय में रुकने की अनिवार्यता का कोई औचित्य नहीं है।
मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा ने कहा कि सरकार यदि शिक्षकों और अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने के बजाय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं और पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध करवाए तो शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार अपने आप होगा।
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष नवीन कुमार शर्मा के अनुसार संगठन की मांग है कि सरकार इस अव्यावहारिक और बेतुके आदेश को तत्काल वापस ले। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन करेगा और इन आदेशों की होली जलाएगा।